दुनिया की सबसे बदसूरत कारें

फ़ेरारी एफ़ 50
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दुनिया की सबसे सुंदर और लक्जरी कारों के बारे में तो अमूमन चर्चा होती ही रहती है, लेकिन ऑटो पत्रिका 'टॉप गियर' ने उन कारों को चुना है जो कार चलाने वालों को फूटी आंख नहीं भाईं.

फ़ेरारी एफ़ 50

200 मील प्रति घंटे की रफ़्तार वाली एफ़40 कार बनाने के बाद इटली की कंपनी फ़ेरारी ने 1996 में एक और कार बाज़ार में उतारी. यह कार थी एफ़ 50. इसके पिछले पहियों में 513 हॉर्सपावर की ताक़त थी और क़ीमत पाँच लाख डॉलर थी, लेकिन फ़ेरारी के दीवानों को इसने न केवल अपनी परफॉर्मेंस से निराश किया, बल्कि दिखने में भी ये फ़ेरारी की सबसे बदसूरत कार थी.

सी3 प्लूरिएल

साइट्रॉन

फ़्रांस की मर्क़ी एक अजीबोग़रीब मॉडल लेकर बाज़ार में उतरी. इसके छत को हटाया जा सकता था, लेकिन फिर वापस जोड़ने पर बारिश में इससे पानी रिसने की शिकायतें आने लगीं. नतीजा ये हुआ कि लोग इसे एयरपोर्ट के टैक्सी स्टैंड से किराए पर लेने के लिए तो तैयार होते थे, लेकिन ख़रीदने के लिए नहीं.

लेक्सस एससी 430

लेक्सस 430

लेक्सस के एससी मॉडल की शुरुआत 1991 में हुई थी. इसके ठीक दस साल बाद लक्जरी कार एससी 430 मॉडल से पर्दा उठा. इसका वजन लगभग 4,000 पाउंड था और सूरत बल्बनुमा.

अल्फ़ा रोमियो जीटीवी 6

अल्फ़़ा रोमियो

अल्फ़ा रोमियो 1960 और 1970 के दशक की रैली चैंपियन कार थी. फिर 1985 में इसका जीटीवी मॉडल उतारा गया. इस मॉडल को इटली के मशहूर डिजाइनर लिबरेटो गियुडिकाटो ने डिजाइन किया था. उत्तर अमरीका में अधिकांश लोगों ने जब इसे देखा तो वे उसे ख़रीदने की हिम्मत नहीं जुटा सके. रही-सही कसर इस कार के पार्ट्स की कमी ने पूरी कर दी.

महिंद्रा सीजे540

महिंद्रा सीजे 540

अगर कार मैकेनिक के नज़रिए से देखें तो यह कार बहुत साधारण, सस्ती और सब जगह मिलने वाली थी. ड्राइवर के नज़रिए की बात करें तो उन्हें इसे चलाने में कोई जुदा अहसास नहीं हुआ. भारत में बनी ये कार 1991 तक विदेशों को बेची जाती रही.

महिंद्रा सीजे 540

दिखने में रफ-टफ दिखने वाली इस जीप में पैजेट डीज़ल इंजन लगा था. आराम को कोई ख़याल नहीं रखा गया था. ऑटो विशेषज्ञों के मुताबिक़ ये दुनिया की सबसे ख़राब कारों में से एक थी.

रॉल्स रॉयस क्रॉनिक

रॉल्स रॉयस क्रॉनिक

शाही कार बनाने वाली ब्रिटेन की कंपनी रॉल्स रायस का 1970 के दशक में दुनिया भर में दबदबा था. लेकिन क्रॉनिक मॉडल को प्रशंसकों ने कतई पसंद नहीं किया. जर्मी क्लार्कसन ने कहा था कि क्रॉनिक में कोई चार्म नहीं है.

लिंकन कॉन्टिनेंटल मार्क 4

लिंकन कॉन्टिनेंटल

फ़ोर्ड मोटर का यह मॉडल 1972 में बाज़ार में उतारा गया. इससे पहले का मॉडल 1968 में उतारा गया था और इसने दुनियाभर के बाज़ारों में खूब धूम मचाई थी. दमदार इंजन होने के बावजूद ये मॉडल कार प्रेमियों के दिल में जगह नहीं बना सका.

कैडिलेक सिमारॉन

कैडिलेक सिमारॉन

बीएमडब्ल्यू ई30 3 सिरीज़ और ऑडी 4000 के मुक़ाबले 1982 में उतारी गई जनरल मोटर की इस कार को लोगों ने नापसंद किया. थ्री चीयर्स की जगह इसे लेकर थ्री जीयर्स (तीन बार मज़ाक) की चुटकी काफ़ी लोकप्रिय रही.

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