इबोला: ठीक होने पर '90 दिन सेक्स से बचें'

इबोला, माली
प्रकाशित

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के मुताबिक़ पश्चिम अफ़्रीका में इबोला वायरस से 4,900 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

वहीं 10,000 से ज़्यादा लोग इस वायरस से संक्रमित हैं.

जानिए इबोला से जुड़े छह अहम आँकड़े.

5,060

मोबाइल फ़ोन की ज़रूरत

इबोला वायरस से बचाव

इस वायरस से प्रभावित देशों में जाने वाली मेडिकल टीमों को मोबाइल फ़ोन की ज़रूरत है, ताकि दूर-दराज के इलाक़ों में लोगों को बताया जा सके कि इबोला कैसे फैलता है.

स्रोत: संयुक्त राष्ट्र का मानवीय राहत से जुड़े मामलों का कार्यालय (ओसीएचए)

50 में एक

लाइबेरियाई स्वास्थ्य कर्मी इबोला से संक्रमित

इबोला

इबोला वायरस का संक्रमण मरीज के शरीर से निकलने वाले स्राव से होता है. इस कारण से स्वास्थ्यकर्मियों के संक्रमित होने का ख़तरा होता है. जहां चिकित्साकर्मियों के लिए पर्याप्त सुरक्षा के अभाव होता है वहां इसके संक्रमण की दर ज़्यादा है.

स्रोत: ओसीएचए

61.48 डॉलर (लगभग 3,767 रुपए)

एक सुरक्षा सूट की क़ीमत

संक्रमण से बचने के लिए मेडिकल टीम के हर सदस्य के लिए यह सुरक्षा सूट पहनना ज़रूरी है. इसमें दस्ताने, मास्क, चश्मे और रबर के जूते शामिल हैं.

इबोला से बचाव

स्रोत: मेडिसिंस सां फ़्रंटियर्स

90 दिन

इबोला से उबरने वाले सेक्स करने से बचें.

इबोला वायरस
इमेज कैप्शन, इबोला वायरस के संक्रमण से 4,900 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है..

इबोला वायरस वीर्य में लंबे समय तक मौजूद रह सकता है. इसलिए विशेषज्ञ इबोला से ठीक होने वाले लोगों को 90 दिन तक सेक्स से बचने या कंडोम का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं.

स्रोत: लंदन स्कूल ऑफ़ हाइजीन एण्ड ट्रॉपिकल मेडिसिन के प्रोफ़ेसर पीटर पिअट. इन्होंने 1976 में इबोला वायरस की खोज की थी.

1.70

इतने लोग लाइबेरिया में हर इबोला पीड़ित से संक्रमित होते हैं.

इबोला का संक्रमण

इसका मतलब है कि हर 10 इबोला पीड़ितों से लाइबेरिया में औसतन 17 अन्य लोगों को संक्रमण हुआ है.

इस तरह के आँकड़ों का उपयोग किसी आबादी में महामारी फैलने की दर जानने के लिए होती है. यह आँकड़ा बदलता रहता है.

चेचक जैसी संक्रामक बीमारी में यह दर 12 से 17 के बीच होती है.

स्रोत: यूरोपियन सेंटर फ़ॉर डिजीज़ एण्ड प्रिवेंशन कंट्रोल

19,980

दफ़नाने वाले किट की ज़रूरत

इबोला

इबोला वायरस के मरीजों का शव भी संक्रामक होता है.

शवों को सुरक्षित तरीक़े से दफ़नाना बीमारी को फैलने से रोकने में सहायक है.

स्रोत: ओसीएचए

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