'जाम से निजात और पीने का साफ़ पानी दे दीजिए'

तख्त श्री हरमिंदर साहिब
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    • Author, सीटू तिवारी
    • पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

पटना साहिब विधानसभा क्षेत्र में घुसते ही गुरुवाणी के पाठ की आवाज़ें ट्रैफ़िक के शोर में घुलने सी लगती है.

थोड़ा आगे बढ़ने पर भजन कीर्तन, अज़ान और चर्च की घंटियों की आवाज़ें शहर की आवाज़ में समाई सी लगती हैं.

मिली-जुली संस्कृति ही पटना साहिब विधानसभा क्षेत्र की पहचान है. बीते 20 साल से यहां से बीजेपी नेता नंद किशोर यादव जीतते रहे हैं.

अबकी बार उनका मुक़ाबला महागठबंधन के प्रत्याशी संतोष मेहता से है. संतोष डिप्टी मेयर रह चुके है और कभी नंद किशोर यादव के क़रीबी भी रहे हैं.

समस्याओं की बात करें तो पटना साहिब की सबसे बड़ी समस्या जाम है. राजधानी पटना से सिटी जाने में घंटों लग जाते हैं. ये हाल तब है जब पटना साहिब क्षेत्र लघु उद्योगों का बड़ा केंद्र है.

पटना साहिब की संकरी गलियां

पटना ज़िला सुधार समिति के राकेश कपूर बताते है, “पटना सिटी में दो मुख्य सड़कें हैं अशोक राजपथ और गुरू गोविंद सिंह पथ. दोनों पर ही अतिक्रमण है और ये सड़कें गली में बदल गई हैं. 1977 में जब हम लोग पढ़ते थे तब बस से कॉलेज जाते थे. अब तो ऐसा सोचना भी सपने जैसा लगता है.”

सिटी की कचौड़ी गली में रहने वाले अशरफ़ कहते हैं, “सिटी में पीने का पानी तो आता है, लेकिन पीने लायक़ नहीं रहता. पाइप फट गए हैं और पूरे शहर की गंदगी उसी सप्लाई वाले पानी में घुस जाती है.”

सिटी में मारूफ़गंज की मंडी, बिहार की सबसे बड़ी किराना मंडी है.

पटना साहिब की संकरी गलियां

मारूफ़गंज किराना व्यवसाय संघ के संरक्षक बसंत लाल गोलवारा बताते है, “ये एशिया की सबसे पुरानी मंडी थी और यहां से मसाला, गल्ला और खारी नमक बांग्लादेश तक जाता था. मंडी में सामान ले जाने के लिए बक़ायदा शहरों के नाम से दिन बंधे रहते थे. मसलन सोमवार को हज़ारीबाग, रांची और मंगलवार को कोई और जगह.”

मंडी में तक़रीबन 1500 दुकानें हैं और तक़रीबन 25 हज़ार लोगों का घर इसी मंडी के सहारे चलता है, लेकिन मंडी में मुलभूत सुविधाएं नहीं हैं.

बसंत लाल कहते हैं, “मंडी में अब साल के कुछ महीने पानी भरा रहता है, तो सड़क, शौचालय, पीने की पानी की व्यवस्था नदारद है. 5 साल पहले तक यहां पुलिस रहती थी, लेकिन अब उनकी संख्या कम कर दी गई है. क्या हमें सुरक्षा नहीं चाहिए?”

पटना सिखों के दसवें गुरू गोविंद सिंह की जन्मस्थली है तो जैन धर्म के सुदर्शन स्वामी का निर्वाण स्थल कमलदल मंदिर भी यहां पर है.

इसके अलावा बिहार का सबसे पुराना चर्च पादरी की हवेली, पतली पतली गलियों में प्राचीन मंदिर, ख़ानकाहे, मकबरों का यहां जाल का बिछा है.

भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित मीर अशरफ़ की मस्जिद
इमेज कैप्शन, भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित मीर अशरफ़ की मस्जिद

वरिष्ठ पत्रकार नवीन रस्तोगी कहते हैं, “यहां पटना कलम का स्कूल था, संगीत के कई घराने थे, लेकिन संरक्षण के अभाव में सब बर्बाद हो गए. ना लोगों ने उनको सहेजा और ना ही सरकार ने कोई चिंता की.”

रसायनशास्त्र के प्रोफ़ेसर वीरेन्द्र जैन का परिवार 1960 में दिल्ली से आकर पटना बस गया था.

वीरेन्द्र कहते हैं, “जब हम यहां आए तो जैनियों की अच्छी ख़ासी संख्या थी, लेकिन धीरे-धीरे यहां के बिगड़ते माहौल के चलते संभ्रान्त जैनी यहां से चले गए. हमारे धार्मिक केंद्रों को सरकार ने सहेजने की कोशिश नहीं की.”

वो निराशा भरे स्वर में कहते हैं, “देखिए हम लोग इन मंदिरों को कितना बचा पाएंगे और हम लोग ख़ुद भी यहां कितने दिन रह पाएंगे. सरकार चाहती तो इन्हें धार्मिक पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करती.”

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