बिहार: अति-पिछड़ों को लुभाने में लगी भाजपा

    • Author, नीरज सहाय
    • पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

बिहार की पल-पल गर्म होती राजनीति हर दिन नए और बदलते समीकरणों का गवाह बन रही है.

राज्य की मुख्य विरोधी पार्टी बीजेपी ने प्रदेश के अति-पिछड़ा समाज के लोगों के बीच संदेश देने के लिए पिछले दिनों कुछ महत्वपूर्ण क़दम उठाए.

पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अति-पिछड़ा समाज से आने वाले पूर्व मंत्री प्रेम कुमार को प्रेस वार्ता के दौरान अपने बग़ल में बैठाकर यह दर्शाने की कोशिश की कि वो भी मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं.

फिर निषाद जाति के उभरते नेता मुकेश साहनी को पार्टी से जोड़ा.

वहीं शुक्रवार को नीतीश सरकार में मंत्री रह चुके भीम सिंह को पार्टी में शामिल कराकर यह संदेश देने की कोशिश की गई कि उनका सम्मान भाजपा में ही है.

प्रेम कुमार

हालाँकि, पिछले साल पूर्व मंत्री भीम सिंह के मारे गए सैनिकों के बारे में विवादित बयान देने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इनकी तीखी आलोचना की थी.

बिहार में अति-पिछड़ा समाज की लगभग 106 जातियां हैं. कुल आबादी में इनका हिस्सा तक़रीबन 22 से 25 प्रतिशत है.

इनमे निषाद, चंद्रवंशी, धानुक, प्रजापति, बढ़ई मुख्य हैं.

हर दिन दिख रही नई सियासी गोलबंदी पर भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल का कहना है कि पार्टी में पहले से ही अति-पिछड़ा समाज के कई नेता हैं.

उनके अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी अति-पिछड़ा समाज से आते हैं.

लोक सभा चुनाव के पहले जब उनका नाम बतौर प्रधानमंत्री तय हुआ तब से इस तबक़े का झुकाव भाजपा के प्रति बढ़ा.

भीम सिंह

समाज का यह बड़ा तबक़ा भाजपा की सरकार को अपनी सरकार मानता है.

विधान सभा चुनाव में भी उनको उचित प्रतिनिधित्व दिया गया है.

हालाँकि, सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ता संजय सिंह का कहना है कि भाजपा के साथ न पिछड़ा है और न ही अति-पिछड़ा समाज है. पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी कल के लड़के को भी निषाद समाज का नेता बता रहे हैं.

उनके साथ भीम सिंह भी जुड़े हैं. ये वही हैं जिन्हें विवादित बयान के चलते प्रधानमंत्री ने निर्लज कहा था.

इनमें से एक धनबली है तो दूसरे के पास न कोई समर्थन है और न ही कोई अपनी पहचान है.

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