'बाल नरेंद्र' की राह पर चले नीतीश कुमार

नीतीश कुमार कार्टून
    • Author, मनीष शांडिल्य
    • पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी के लिए
  • प्रकाशित

नीतीश कुमार को नरेंद्र मोदी से चाहे गुरेज़ हो लेकिन चुनाव जीतने के लिए मोदी के नुस्खों से उन्हें कोई परहेज़ नहीं है.

ऐसे कई उदाहरण है जिनमें नीतीश कुमार के समर्थन में चलाया जा रहा प्रचार बीते साल के नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार अभियान की नक़ल दिखाई दे रहा है.

इस पूरे प्रचार अभियान को उन्हीं प्रशांत किशोर ने डिज़ाइन किया है जो साल 2014 में नरेंद्र मोदी की प्रचार टीम का अहम हिस्सा थे.

नीतीश कुमार ने सार्वजनिक रूप से यह बताया है कि प्रशांत उनके लिए काम कर रहे हैं, प्रशांत पार्टी की बैठकों में भी शामिल हो रहे हैं, सार्वजनिक रूप से पार्टी सम्मेलनों को संबोधित कर रहे रहे हैं.

कॉमिक्स के हीरो

कार्टून नीतीश कुमार

पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव के दौरान ‘बाल नरेंद्र’ कॉमिक्स आई थी जिसमें नरेंद्र मोदी के बचपन की बहादुरी, मेहनत और ईमानदारी दिखाई गई थी.

अब विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार के जीवन पर आधारित कॉमिक्स सीरीज़ आ गई है.

इस सीरीज़ की पहली कॉमिक्स है ''मुन्ना से नीतीश'' जिसमें बताया गया है कि अपनी माँ के मुन्ना, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कैसे बने.

इस कॉमिक्स के पन्ने फ़ेसबुक पर ‘फिर एक बार नीतीश कुमार’ नाम के एक कम्युनिटी पेज पर पोस्ट किए जा रहे हैं.

मुन्ना से नीतीश कुमार

इस फ़ेसबुक पन्ने पर जानकारी दी गई है, "यह पन्ना नीतीश कुमार जी के समर्थकों द्वारा उनके समर्थकों के लिए चलाया जा रहा है."

इस पेज़ की सामग्री का नीतीश कुमार और उनकी पार्टी से जुड़े कई कार्यक्रमों में भरपूर इस्तेमाल हो रहा है.

दूसरी कॉमिक सीरीज़ है ''सत्तू पे सत्ता'' जिसमें राजनीति के इर्द-गिर्द घूम रहा चुनावी चक्कलस है.

कॉफ़ी पर चर्चा

बिहार, नीतीश कुमार

प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी की 'चाय पर चर्चा’ ने मीडिया का ध्यान खींचा था. वे खुद को कई बार चाय वाले वाले के रूप में भी पेश करते रहे हैं.

नीतीश कुमार को शायद ये लगा होगा कि चाय वाले तो मोदी हैं इसलिए उन्होंने अपनी चर्चा के लिए चाय की जगह कॉफ़ी को चुना है.

अगर आपको नीतीश कुमार से कॉफ़ी पर मिलना है तो बस एक फॉर्म भरने की ज़रूरत है.

नारे की भी नक़ल

नीतीश कुमार, बिहार

लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने ‘अबकी बार मोदी सरकार’ की तर्ज़ पर कई नारे तैयार किए थे.

बिहार में चुनाव से पहले ‘फिर एक बार नीतीश कुमार’ के नारे गूँज रहे हैं.

"धीमी न पड़े विकास की रफ़्तार, फिर एक बार नीतीश कुमार" या "बहुत हुआ जुमलों का वार, फिर एक बार नीतीश कुमार" जैसे नारे आपको फ़ेसबुक से लेकर पटना की सड़कों तक पर सुनाई-दिखाई दे जाएँगे.

मिस्ड कॉल मेंबर

मिस्ड कॉल देकर पार्टी से जुड़ने का आइडिया 'आम आदमी पार्टी' लेकर आई थी लेकिन बीजेपी ने फ़ोन से सदस्य बनाने की मुहिम शुरू की.

नतीजन बीजेपी ने दावा किया अपनी मुहिम के चलते वह दुनिया में सबसे अधिक सदस्यों वाली पार्टी बन गई है.

बिहार की सबसे बड़ी पार्टी बनने के ख़्वाहिश रखने वाले नीतीश कुमार ने जनता को एक नंबर दिया है, जिसके ज़रिए आप उनकी पार्टी और कार्यक्रमों से जुड़ सकते हैं.

असल या नक़ल?

इस पर जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद केसी त्यागी कहते हैं, ‘‘नक़ल के साथ अक़्ल की ज़रूरत पड़ती है. वो हमारे पास काफी है. हम नरेंद्र मोदी की राजनीति की नक़ल नहीं करेंगे.’’

भारतीय जनता पार्टी इस नरेंद्र मोदी मार्का प्रचार अभियान का मुक़ाबला कैसे करेगी?

यह पूछने पर बिहार विधानसभा में विरोधी दल के नेता नंद किशोर यादव कहते हैं, ‘‘नक़ल करने के लिए जिन बातों की ज़रूरत होती है उनका नीतीश कुमार में घोर अभाव है."

माहौल में अंतर

वरिष्ठ पत्रकार सुरूर अहमद का मानना है कि 2014 के आम चुनाव और इस साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव के माहौल में बहुत अंतर है.

वह कहते हैं, ‘‘नरेंद्र मोदी का मुक़ाबला एक कमज़ोर हो चुकी सरकार से था, वहीं नीतीश एक मजबूत विपक्ष से मुक़ाबला करेंगे.’’

सुरुर के मुताबिक़ ऐसे में सिर्फ आक्रामक प्रचार अभियान से काम नहीं चलेगा नीतीश कुमार को कुछ ठोस राजनीतिक एजेंडों को भी आगे करना होगा.

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