जहां झुकते हैं हिंदू मुसलमान, दोनों के सिर

रामदेवरा मंदिर
    • Author, आभा शर्मा
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

राजस्थान में जैसलमेर से क़रीब 12 किलोमीटर दूर रामदेवरा में मध्यकालीन लोक देवता बाबा रामदेव के दर्शन के लिए इन दिनों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है.

सांप्रदायिक सदभाव के प्रतीक माने जाने वाले इस लोक देवता की समाधि के दर्शन के लिए विभिन्न धर्मों को मानने वाले, ख़ास तौर पर आदिवासी श्रद्धालु देश भर से इस सालाना मेले में आते हैं.

पढ़िए रिपोर्ट विस्तार से

बाबा रामदेव को कृष्ण भगवान का अवतार माना जाता है.

उनकी अवतरण तिथि भाद्र माह के शुक्ल पक्ष द्वितीय को रामदेवरा मेला शुरू होता है. यह मेला एक महीने से अधिक चलता है.

वैसे बहुत से श्रद्धालु भाद्र माह की दशमी यानी रामदेव जयंती पर रामदेवरा अवश्य पहुँचना चाहते हैं.

रामसा पीर

बाबा रामदेवरा की समाधि

मुस्लिम दर्शनार्थी इन्हें “बाबा रामसा पीर” कह कर पुकारते हैं.

रामदेवरा मंदिर मेला

इस बार 630वें रामदेवरा मेले में भी श्रद्धालु गाते बजाते और ढोल नगाड़ों पर थाप देते हुए बाबा की लंबी ध्वज पताकाएं लिए रामदेवरा की ओर बढ़ते हुए देखे जा सकते हैं.

जैसलमेर से रामदेवरा तक का पूरा मार्ग भजन “ओ अजमाल जी रा कंवरा, माता मेनादे रा लाल, रानी नेतल रा भरतार, म्हारो हेलो सुणो जी राम पीरजी” से गुंजायमान रहता है.

लम्बी क़तारें

रामदेवरा मेला

मेले के दौरान बाबा के मंदिर में दर्शन के लिए चार से पांच किलोमीटर लंबी कतारें लगती हैं और जिला प्रशासन के अलावा विभिन्न स्वयंसेवी संगठन दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए निःस्वार्थ भोजन, पानी और स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं.

श्रद्धालु पहले जोधपुर में बाबा के गुरु के मसूरिया पहाड़ी स्थित मंदिर में भी दर्शन करना नहीं भूलते. उसके बाद जैसलमेर की ओर कूच करते हैं.

रामदेवरा का मेला

लोककथाओं के अनुसार बाबा के पिता अजमाल और माता मीनल ने द्वारिका के मंदिर में प्रार्थना कर प्रभु से उन जैसी संतान प्राप्ति की कामना की थी.

इसीलिए बाबा रामदेव को कृष्ण का अवतार माना जाता है.

मन्नत

रामदेवरा का मेला

बहुत से लोग रामदेवरा में मन्नत भी मांगते हैं और मुराद पूरी होने पर कपड़े का घोड़ा बनाकर मंदिर में चढ़ाते हैं.

कोई छोटा घोड़ा बनता है तो कोई बड़ा.

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