गोधरा: 'जीने के लिए लड़ना ही पड़ेगा, तो लड़ेंगे'

गुजरात बिलकिस बानो
    • Author, चिरंतना भट्ट
    • पदनाम, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए, मुंबई से
  • प्रकाशित

तीन मार्च 2002 के बाद उनकी आंखों से सुकून ग़ायब हो चुका है. डर पीछा नहीं छोड़ता और मायूसी जैसे उसका नसीब बन चुकी है.

<bold><documentLink href="/hindi/multimedia/2014/03/140301_bilqis_bano_sdp.shtml" document-type="audio"> सुनें बिलकिस की कहानी, उन्हीं की ज़ुबानी</documentLink></bold>

अपनी नज़र के सामने परिवार के 14 लोगों की हत्या होते देखना, जिसमें खुद की बच्ची भी शामिल हो, सामूहिक बलात्कार का शिकार बनकर अधमरी हालात में कई घंटों तक पड़े रहना और फिर होश आने पर बड़ी मुश्किल से पास की पहाड़ी पर छिपकर अपनी जान बचाना.

जब यह सब हुआ उस समय बिलकिस बानो की उम्र करीब बीस साल होगी. गुजरात में 2002 में हुए सांप्रदायिक दंगों को आज बारह साल बीत चुके हैं, लेकिन बिलकिस बानो का परिवार उस हादसे का परिणाम आज भी भुगत रहा है. बिलकिस अब तीन बेटियों और एक बेटे की मां हैं.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की मदद से बिलकिस का केस महाराष्ट्र लाया गया. इस मामले में बलात्कार के अभियुक्तों को सजा सुनाई गई.

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मुश्किलें

बिलकिस आज विस्थापितों जैसी जिंदगी जी रही हैं. जिस समय उनके साथ ये हादसा हुआ वो अपने अब्बा के गाँव से परिवार के लोगों के साथ दूसरे गाँव जा रही थीं.

गुजरात बिलकिस बानो

अपने गाँव की बात करने पर बिलकिस बताती हैं, "पूरा परिवार ख़त्म हो गया हमारा. मार डाला सबको. अब हम लोग परिवार से अलग रह रहे हैं."

वो कहती हैं, "गुजरात सरकार ने हमारे लिए कुछ नहीं किया है. कोई मदद नहीं की. घरवालों को भी परेशानी होती है कि हमारे बच्चे अकेले रह रहे हैं. उनकी गुज़र बसर कैसे होगी. उनको क्या महसूस हो रहा होगा."

बिलकिस आज भी किसी को अपने घर का पता नहीं बतातीं. उन्होंने 12 साल में कई बार घर बदले हैं. उन्होंने कहा, "हमने कम से कम पन्द्रह से बीस बार घर बदला है." बिलकिस अपने चार बच्चों और पति याकूब के साथ रहती हैं.

घर का खर्च दूध बेचकर चलता है, हालांकि मुश्किलें तो बनी ही रहती हैं. उनके पति याकूब ने बताया कि गाँव से उनके पिताजी थोड़ी मदद भेज देते हैं बाकी और कोई सहारा नहीं है.

बिलकिस जिस गाँव मे पली बढ़ीं, वहां वापस जाने के बारे में वो सोच भी नहीं सकतीं. रिश्तेदार भी उनसे बहुत कम मिला करते हैं.

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धमकियाँ

बिलकिस के साथ जब 2002 में बलात्कार हुआ तो उस समय वो गर्भवती थीं. उनकी तीन साल की बेटी सालेहा की भी बेहरमी से हत्या कर दी गई.

गुजरात बिलकिस बानो

आज बिलकिस के बच्चों में बड़ी बेटी हाजरा, दूसरी फातिमा और बेटा यासीन है. लेकीन उनकी सबसे छोटी बेटी उनके लिए खास है क्योंकि उसका नाम उन्होंने सालेहा रखा है, अपनी उस बेटी की याद में जिसकी हत्या उनकी नज़रों के सामने हुई थी.

मुकदमे के निर्णय को लेकर बिलकिस का क्या मानना है, यह पूछने पर वह बताती हैं,''तसल्ली हुई लेकिन अब भी जिनको सजा हुई वो आज भी गांव में पेरोल पर आते है. फिर गाँव में आकर हमारे लोगों को डराते हैं, मीटिंग करते हैं- जाने पता नहीं क्या-क्या करते हैं वहां जाकर. अभी भी परेशान करते हैं.''

बिलकिस ने धमकियों के बारे में पूछने पर बताया कि, "ऐसा तो होता ही है. हमको भी डर लग रहा है कि हम कैसे रहेंगे. बच्चों को भी पालना है."

बिलकिस को बहुत तकलीफ़ है कि इतना कुछ होने के बाद भी उनके प्रति सरकार का नजरिया काफ़ी उदासीन रहा है.

वह कहती हैं, "एक तरफ़ रोना आता है, ग़ुस्सा भी आता है. हमारे लिए कोई कुछ नहीं कर पाया. गुजरात सरकार नहीं कर पाई. गुजरात पुलिस नहीं कर पाई. कोई भी मदद नहीं मिली."

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संघर्ष

बिलकिस के पति याकूब ने कहा, "हमने 12 साल इधर-उधर घूम कर किसी तरह से अपनी जान बचाकर काटे हैं." याकूब को बेहद अफसोस है कि उनकी जिंदगी पूरी तरह से बिखर चुकी है. वो गुजरात में हिंदू-मुसलमान के बीच बने हालात को लेकर भी बहुत नाराज़ हैं.

बारह साल तक बार-बार घर बदलते रहना और ग़रीबी के कारण गुज़ारा आसान नहीं हैं. आज भी बिलकिस को एक ही बात परेशान करती है, "हमारे साथ ही ऐसा क्यों हुआ. हमने क्या गुनाह किया था?"

गुजरात बिलकिस बानो

इस सवाल का जवाब मिलना तो शायद मुमकिन नहीं है और बिलकिस भी मन ही मन में शायद यह बात समझती हैं.

अब उनकी जिंदगी का एक ही मक्सद है. वो अपने बच्चों को अच्छे से पढ़ाना चाहती हैं. वो कहती हैं, "बाहर जाने में डर तो लगता है लेकिन किया ही क्या जा सकता है. गाँव से भी अफवाहें ज्यादा आती हैं कि तुमको ऐसा कर देंगे. तुमको वैसा कर देंगे, लेकिन डर कर भी क्या करे. जो हो गया है उसके साथ हमें लड़ना ही पड़ेगा, तो लड़कर ही रहेंगे."

बिलकिस का पूरा दिन घर का काम करने में और बच्चों की पढाई ठीक से हो उसका ध्यान रखने में व्यतीत होता है.

जो हुआ है उसे भूलना मुमकिन नहीं है और कभी उस हादसे के बारे में ज़्यादा सोच लेती हैं तो बिलकिस की तबियत ख़राब हो जाती है लेकिन अपने बच्चों की ख़ातिर वह हौसला बनाए हुए हैं.

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