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हर तबादले में कुछ खोने का अहसास होता है: अशोक खेमका
- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
हरियाणा के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक खेमका का 50वीं बार तबादला कर दिया गया है.
1991 बैच के आईएएस अधिकारी अशोक खेमका की लगभग 24 साल की सेवा का औसत निकाला जाए तो उनका हर छह महीने में तबादला हुआ है. उन्हें सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण विभाग से युवा एवं खेल मामलों के विभाग में भेज दिया गया है.
तबादले पर प्रतिक्रिया देते हुए खेमका ने बीबीसी से कहा, "एक पीड़ित का जब बार-बार बलात्कार होता है तो वो बलात्कार रूटीन कभी नहीं होता है. 80 बार भी बलात्कार होता है और 81वीं बार भी वो बलात्कार ही होता है."
लगता है कुछ खो गया
खेमका कहते हैं, "हर तबादले के बाद कुछ खोने का सा अहसास होता है. लगता है हार गया हूं लेकिन फिर लगता है कि मैं सिर्फ़ स्वयं से हार सकता हूं. शुरू में बुरा लगता है लेकिन फिर ज़िंदगी अपनी रफ़्तार पर लौट आती है."
खेमका कहते हैं, "मैं महज़ अस्सी दिन इस पद पर था. मेरे तबादले का निश्चित रूप से एक कारण है और वो कारण भ्रष्ट है." खेमका ने कहा कि सरकार से ये सवाल पूछा जाना चाहिए कि मेरा तबादला प्रशासनिक हित में हुआ है या निजी स्वार्थ में.
खेमका साल 2012 में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा के ज़मीनी सौदे रद्द करने के बाद चर्चा में आए थे. उस समय हरियाणा में और केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी.
ईमानदार छवि
अशोक खेमका की छवि एक ईमानदार आईएएस अधिकारी की है. क्या ये छवि काम को मुश्किल कर देती है? इस सवाल पर खेमका कहते हैं, "मैं अपनी एक छवि लेकर किसी भी विभाग में जाता हूं. वहां जो स्वार्थ निहित तत्व होते हैं वो मेरा तबादला कराने के लिए सक्रिय हो जाते हैं. ये सब काम का हिस्सा है."
खेमका याद करते हैं, "जुलाई 2014 में एक वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री ने नॉर्थ ब्लॉक के अपने कार्यालय में मुझसे कहा था कि आपकी छवि से कई मंत्री असहज महससू करते हैं."
अपने तबादले के बाद किए ट्वीट में खेमका ने कहा था, "बहुत योजनाएं थीं. एक और तबादले की ख़बर. एक बार फिर से क्रैश लैंडिंग. स्वार्थ निहित तत्व जीत गए. ये सब पहले देखा है. ये अस्थायी है. नई ऊर्जा के साथ फिर से काम करूंगा."
ये स्वार्थ निहित तत्व कौन है जो हर बार खेमका का तबादला करा देते हैं? इस सवाल पर खेमका कहते हैं, "मैंने 2012 से आज तक किसी का नाम नहीं लिया. मैं नाम नहीं लेना चाहता. ये एक मुद्दा है मैंने उस मुद्दे को ही रेखांकित किया है. इसमे सुधार होना चाहिए. किसी का नाम लूंगा तो मामला व्यक्तिगत हो जाएगा."
तबादले की वजह बताते हुए खेमका कहते हैं, "मैं एक सार्वजनिक सेवा में हूं और सार्वजनिक दायित्व का निर्वाह कर रहा हूं. कुछ लोग कहते हैं ये काम कर दो, मैं कहता हूं ये ग़लत है नहीं करूंगा. बस इतनी सी बात होती है. वो अपना दांव चलाते हैं मेरा तबादला करा देते हैं. ठीक है."
सरकार की प्रतिक्रिया
हरियाणा के मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार अमित आर्या ने बीबीसी से कहा, "अशोक खेमका एक वरिष्ठ और ज़िम्मेदार अधिकारी हैं, यदि वो सरकार के किसी मंत्री को भ्रष्ट बता रहे हैं तो उन्हें उनका नाम भी सार्वजनिक करना चाहिए ताकि सरकार उस पर कुछ कार्रवाई कर सके."
तबादले को रूटीन बताते हुए आर्या ने कहा, "सिर्फ़ खेमका का ही नहीं बल्कि 13 और अधिकारियों का तबादला किया गया है. हर सरकार तबादले करती है. उन्हें एक बेहतर विभाग में भेजा गया है जहां उनके पास काम करने के और बेहतर मौके होंगे."
क्या करना चाहते थे खेमका?
खेमका सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण विभाग में थे जिसका काम समाज के सबसे निचले और वंचित तबकों को सरकारी मदद मुहैया कराना होता है.
खेमका कहते हैं, "हमने पुनर्वास को लेकर एक समूची योजना बनाई थी. पुनर्वास योजना पर ही मेरा मुख्य फ़ोकस था. समाज में दस प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो या तो निशक्त हैं या किसी न किसी प्रकार के नशे से ग्रस्त हैं."
"हमारा विभाग साल में 25 लाख लोगों को पांच से साढ़े पांच हज़ार करोड़ रुपए का वितरित करता है. हम इसमें आधार और ईकेवाईसी के माध्यम से पारदर्शिता लाना चाहते थे जिससे विभाग को हर साल लगभग एक हज़ार करोड़ रुपए की बचत होती. बहुत से लोग हैं जो मृत हैं या अपात्र हैं लेकिन उनके नाम से भी राशि वितरित की जा रही है. स्वयं सत्यापन की योजना लागू होने के बाद ये रुक जाती."
क्या सज़ा है ये तबादला?
खेमका कहते हैं कि यदि विभाग के लिहाज से देखा जाए तो उनका तबादला एक बेहतर विभाग में हुआ है. खेमका कहते हैं, "जिस विभाग में मुझे भेजा गया है वो हरियाणा के मापदंड के हिसाब से बेहतर महकमा है लेकिन मैं इस विभाग में उड़ान भर चुका था और मुझे लग रहा है कि मेरी क्रैश लैंडिंग करवा दी गई है. जो निजी स्वार्थ से प्रेरित लोग हैं उन्होंने मुझे खींचकर ज़मीन पर उतार दिया है. मेरी कार्ययोजनाएं धरी रह गई हैं."
परिवार में प्रतिक्रिया
क्या तबादलों का असर परिवार पर होता है, इस सवाल पर खेमका कहते हैं कि अब सबको आदत हो गई है.
वो कहते हैं, "मेरी पत्नी की बहन को बेटी हुई है जिन्हें देखने वो मुंबई गईं हैं. कम से कम मेरी पत्नी ने तो हंसकर यही कहा है कि अच्छा ही हुआ है. मेरा परिवार इस सब का आदी हो गया है."
खेमका के दो बेटे हैं जिनमें से एक कैंब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ रहे हैं और दूसरे नेशनल लॉ स्कूल बेंगलुरू से वकालत की पढ़ाई कर रहे हैं.
वकालत की पढ़ाई
अपने रोज़मर्रा के जीवन के बारे में खेमका कहते हैं, "मैं सुबह पांच बजे उठ जाता हूं. रोज़ाना योग करता हूं और टहलने जाता हूं. इसी में लगभग दो घंटे खर्च हो जाते हैं. फिर एक घंटा अख़बार पढ़ता हूं और दफ़्तर के लिए निकल जाता हूं. दफ़्तर के बाद शाम को मैं एलएलबी की क्लास लेने विश्वविद्यालय जाता हूं. घर लौटकर पत्नी और मां के साथ समय बिताता हूं, इसी में दिन बीत जाता है. "
खेमका नौकरी के साथ वकालत की पढ़ाई भी कर रहे हैं. वो कहते हैं कि रिटायर होने के बाद वकालत करना चाहता हूं.
कौन हैं खेमका?
मूलरूप से कोलकाता के अशोक खेमका ने आईआईटी खड़गपुर और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़ंडामेंटल रिसर्च में पढ़ाई की. रॉबर्ट वाड्रा की ज़मीन डील मामले को उजागर करने के बाद उनका नाम मीडिया में आया. उनकी पहचान व्हिसिल ब्लोअर के रूप में है.