विरोध को द्रोह समझा जाता है: हंसल मेहता

    • Author, मधु पाल
    • पदनाम, मुंबई से बीबीसी हिंदी के लिए
  • प्रकाशित

फिल्मकार हंसल मेहता का कहना है कि आजकल विरोध की गुंजाइश सिमटती जा रही है और विरोध करने वालों को 'राष्ट्रविरोधी' क़रार दिया जाता है.

जल्द ही हंसल मेहत की फिल्म 'अलीगढ़' रिलीज़ होने वाली है, जिसे कई विदेशी फ़िल्म समारोहों में सराहा गया है.

समलैंगिक संबंधों पर बनी ये फिल्म अलीगढ़ विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्रोफ़ेसर डॉक्टर श्रीनिवास रामचंद्र सिरस के जीवन पर आधारित है.

सिरस को समलैंगिक रिश्तों के चलते अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा था और फिर बाद में रहस्यमयी ढंग से उनकी मौत हो गई थी.

प्रोफ़ेसर सिरस का यह केस जितना विवादित है उतना ही भारत में समलैंगिकता का मुद्दा भी विवादित है, ऐसे में क्या समलैंगिकता के मुद्दे पर फ़िल्म बनाया जाना आफ़त सिर लेने जैसा नहीं है.

इस बारे में हंसल ने बीबीसी हिंदी को बताया, "यह फ़िल्म इस मुद्दे पर चर्चा किए जाने की एक अपील है, हमने फ़िल्म में समलैंगिकता के समर्थन को जितनी जगह दी है उतनी ही जगह इसके विरोध को भी दी है."

वो आगे कहते हैं, "दरअसल आजकल समस्या है कि विरोध को द्रोह समझ लिया जाता है और हर विरोधी को 'एंटी नेश्नालिस्ट' का लेबल दे दिया जाता है, लेकिन मेरा मानना है कि चर्चा करने के लिए हम स्वतंत्र हैं और हर उस चीज़ पर बात होनी चाहिए जिसे लेकर दो पक्ष सामने हैं."

हंसल मेहता इससे पहले 'शाहिद' जैसी फ़िल्म बनाकर राष्ट्रीय पुरस्कार ले चुके हैं और उनकी आने वाली फ़िल्म से भी कई बड़ी उम्मीदें हैं.

हंसल मानते हैं कि वो सिर्फ़ संवेदनशील मुद्दों पर ही फ़िल्में नहीं बनाते बल्कि अपनी फ़िल्मों में आम लोगों की कहानियां दिखाते हैं, "मैं कोई ऑर्ट फ़िल्मों की फ़ैक्ट्री नहीं हूं कि गंभीर मुद्दों पर ही फ़िल्में बनाऊंगा, लेकिन मैं ऐसी फ़िल्में बनाता हूं जिनमें कहानी आम आदमी की होती है."

हंसल को अपनी फ़िल्मों के आर्ट या ऑफ़बीट कहे जाने पर दिक्कत होती हैं, "ऑफ़बीट तो फ़िल्म तब हुई न जब उसमें पैसा नहीं लगा, मेरी फ़िल्म में पैसा लगता है, हमें भी मुनाफ़ा कमा कर निर्माता को देना होता है, आप कैसे इसे ऑफ़बीट करार दे देते हैं."

लेखक अपूर्व भी इस बात में जोड़ते हैं, "हमने आम लोगों के लिए फ़िल्म बनाई है और अगर क्रिटिक्स को भी यह फ़िल्म पसंद आ रही है इसका मतलब यह नहीं है कि आप इस रिलीज़ से पहले ही ऑफ़बीट का लेबल लगा दें."

फ़िल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे मनोज वाजपेयी और राजकुमार राव भी इस फ़िल्म को एक चर्चा का निमंत्रण मानते हैं.

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