फ़िल्म समीक्षा: मिशन इम्पॉसिबल 5

    • Author, सुशांत एस मोहन
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मुंबई
  • प्रकाशित

मिशन इम्पॉसिबल- रोग़ नेशन

निर्देशक - क्रिस्टफ़र मैक्वैरी

रेटिंग - **** 4 स्टार

ये मिशन इम्पॉसिबल की पांचवी कड़ी है और जब ये फ़िल्म आप देखेंगे तो आपको यकीन हो जाएगा की 'मिशन इम्पॉसिबल' सिरीज़ की यह अब तक की सबसे बेहतरीन फ़िल्म है.

फ़िल्म की शुरूआत के 10 मिनट में दिखाया गया 'प्लेन स्टंट' ही आपके टिकट के पैसे वसूल कर लेता है और इसके बाद की फ़िल्म आपको बोनस जैसी लगती है.

अगर आप 'आईएमएफ़' (एक काल्पनिक जासूसी संस्था) के एजेंट ईथन हंट (टॉम क्रूज़) के फ़ैन हैं तो ये फ़िल्म आपकी दीवानगी को बढ़ा सकती है और अगर ये आपकी ईथन से पहली मुलाक़ात है तो बहुत मुमकिन है कि आप उनके मुरीद हो जांए.

53 साल के टॉम

जब ये फ़िल्म रिलीज़ हो रही थी तो आलोचकों को लग रहा था कि 53 साल के टॉम क्रूज़ अब ऐक्शन और रोमांच से भरपूर एजेंट ईथन हंट के किरदार के लिए फ़िट नहीं हैं लेकिन उन्होंने अपने आलोचकों को ग़लत साबित कर दिया.

इस फ़िल्म के सभी ऐक्शन सीक्वेंस टॉम ने खुद किए हैं और अगर आप एक बार इन ऐक्शन सीक्वेंस को पर्दे पर देखेंगें तो आप भी उनकी उम्र को लेकर सोच में पड़ सकते हैं.

ईथन हंट कार को हवा में उड़ा रहा है, बाइक रेस कर रहा है, तीन मिनट तक पानी में सांस ले रहा है लेकिन सबसे रोमांचक दृश्य है जब वो टेक ऑफ़ कर रहे जहाज़ पर लटका हुआ है.

कहानी

मिशन इम्पॉसिबल की हर फ़िल्म की तरह इस बार फ़िल्म किसी मिशन के मिलने से शुरू नहीं होती.

अमरीकी खुफ़िया एजेंसी आईएमएफ़ को उस वक़्त निरस्त कर दिया जाता है जब ईथन हंट एक ख़तरनाक़ आतंकवादी संस्था 'सिंडिकेट' के सरगना तक पहुंच जाते हैं.

अपनी एजेंसी के निरस्त हो जाने के बाद इस आतंकवादी संस्था 'सिंडीकेट' के ख़ात्मे के लिए हंट और उसके कुछ विश्वसनीय साथियों को अकेले ही प्रयास करने हैं और इस कोशिश को पूरा करने के लिए उन्हें ब्रिटिश प्रधानमंत्री को अगवा करना है, यही है इस बार का मिशन इम्पॉसिबल.

बॉलीवुड-हॉलीवुड

इस फ़िल्म को देखते हुए अगर आपको 'एक था टाइगर', 'बैंग बैंग' और 'एजेंट विनोद' याद आएं तो हैरान न हों क्योंकि वे फ़िल्मे टॉम क्रूज़ की ही फ़िल्मों से प्रेरित थीं.

फ़िल्म में हिंदी सिने प्रेमियों के लिए भरपूर मसाला है और अगर आप ऐक्शन-थ्रिलर और सस्पेंस से भरी फ़िल्में पसंद करते हैं तो ये फ़िल्म आपको बहुत पसंद आने वाली है.

हां फ़िल्म में दो बार आपको 'बीबीसी' के भी दर्शन होंगे क्योंकि इतनी मार धाड़ और धमाकों के बाद मीडिया तो आएगा ही न !

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