मुझे बदकिस्मत मानते थे : खय्याम

खय्याम
    • Author, मधु पाल
    • पदनाम, मुंबई से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

संगीत प्रेमियों के लिए खय्याम का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं.

'उमराव जान', 'बाज़ार', 'कभी-कभी', 'नूरी', 'त्रिशूल' जैसी फ़िल्मों के गीतों की धुन बनाने वाले संगीतकार मोहम्मद ज़हूर खय्याम संगीत प्रेमियों के कानों में शहद घोलते आए हैं.

18 फ़रवरी को खय्याम 88 साल के हो गए. इस मौक़े पर बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने अपने फ़िल्मी करियर और निजी ज़िंदगी के कई राज़ खोले.

हीरो बनने आए थे

खय्याम

खय्याम ने बताया कि वो कैसे बचपन में छिप–छिपाकर फ़िल्में देखा करते थे जिसकी वजह से उनके परिवार वालों ने उन्हें घर से निकाल दिया था.

खय्याम अपने करियर की शुरुआत अभिनेता के तौर पर करना चाहते थे पर धीरे-धीरे उनकी दिलचस्पी फ़िल्मी संगीत में बढ़ती गई और वह संगीत के मुरीद हो गए.

उन्होंने पहली बार फ़िल्म 'हीर रांझा' में संगीत दिया लेकिन मोहम्मद रफ़ी के गीत 'अकेले में वह घबराते तो होंगे' से उन्हें पहचान मिली.

फ़िल्म 'शोला और शबनम' ने उन्हें संगीतकार के रूप में स्थापित कर दिया.

उमराव जान

रेखा

खय्याम ने बताया कि 'पाकीज़ा' की जबर्दस्त कामयाबी के बाद 'उमराव जान' का संगीत बनाते समय उन्हें बहुत डर लग रहा था.

उन्होंने कहा, "पाकीज़ा और उमराव जान की पृष्ठभूमि एक जैसी थी. 'पाकीज़ा' कमाल अमरोही साहब ने बनाई थी जिसमें मीना कुमारी, अशोक कुमार, राज कुमार थे. इसका संगीत गुलाम मोहम्मद ने दिया था और यह बड़ी हिट फ़िल्म थी. ऐसे में 'उमराव जान' का संगीत बनाते समय मैं बहुत डरा हुआ था और वो मेरे लिए बहुत बड़ी चुनौती थी."

खय्याम ने आगे कहा, "लोग 'पाकीज़ा' में सब कुछ देख सुन चुके थे. ऐसे में उमराव जान के संगीत को खास बनाने के लिए मैंने इतिहास पढ़ना शुरू किया."

आखिरकार खय्याम की मेहनत रंग लाई और 1982 में रिलीज हुई मुज़फ़्फ़र अली की 'उमराव जान' ने कामयाबी के झंडे गाड़ दिए.

ख़य्याम कहते हैं, "रेखा ने मेरे संगीत में जान दाल दी. उनके अभिनय को देखकर लगता है कि रेखा पिछले जन्म में उमराव जान ही थी."

'बहुत बदकिस्मत'

खय्याम

खय्याम की सभी फिल्मों का म्यूज़िक हिट हुआ लेकिन कभी सिल्वर जुबली नहीं कर पाया था, इस बात का अहसास ख़य्याम को यश चोपड़ा ने दिलाया.

खय्याम

खय्याम कहते हैं, "यश चोपड़ा अपनी एक फ़िल्म का म्यूज़िक मुझसे करवाना चाहते थे. लेकिन सभी उन्हें मेरे साथ काम करने के लिए मना कर रहे थे. उन्होंने मुझे कहा भी था कि इंडस्ट्री में कई लोग कहते हैं कि खय्याम बहुत बदकिस्मत आदमी हैं और उनका म्यूज़िक हिट तो होता है लेकिन जुबली नहीं करता."

वह आगे कहते हैं, "इन सब बातों के बावजूद मैंने यश चोपड़ा की फ़िल्म का म्यूज़िक दिया और उस फ़िल्म ने डबल जुबली कर डाली और सबका मुंह बंद कर दिया."

'एक पटरानी..'

आशा भोसले

खय्याम ने लता मंगेशकर, आशा भोंसले, किशोर कुमार, अनवर अली, मुकेश, शमशाद बेगम, मोहम्मद रफ़ी जैसे बेहतरीन गायकों के साथ काम किया.

लेकिन आशा और लता दोनों बहनों की आवाज़ के साथ उनका संगीत बहुत कामयाब रहा.

ख़य्याम कहते हैं, "मैं इन दो बहनों के लिए कहूंगा कि एक संगीत की पटरानी हैं तो दूसरी महारानी. मैं जब भी इनसे मिलता हूं तो हम बस यही बात करते हैं कि कैसे ज़माना बदल गया है."

बेटे के गुज़रने का दुख

खय्याम

खय्याम की पत्नी जगजीत कौर भी अच्छी गायिका हैं. उन्होंने ख़य्याम के साथ कुछ फिल्मों जैसे 'बाज़ार', 'शगुन' और 'उमराव जान' में काम भी किया.

उम्र के इस पड़ाव पर आकर उन्हें अपने जवान बेटे के गुज़रने का बेहद दुख है. दो साल पहले दिल का दौरा पड़ने से उनके बेटे की मौत हो गई थी और तभी से वह सभी से दूर-दूर रहने लगे.

बीबीसी से बात करते हुए खय्याम ने बताया कि बेटे के गुज़र जाने के बाद कोई इच्छा नहीं बची. उनकी पत्नी ज़रूरतमंदों के लिए एक ट्रस्ट खोलने वाली हैं.

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