91 फ़ीसदी पाकिस्तानियों की इंडिया पर है ये राय, प्यू रिसर्च के सर्वे पर क्या बोले विशेषज्ञ

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, सौरभ यादव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- ........से, नई दिल्ली
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 8 मिनट
"स्वतंत्र भारत और पाकिस्तान बनने के करीब 80 साल बाद भी यहां के आम लोगों के बीच एक-दूसरे को लेकर नकारात्मक सोच हावी है और दोनों देश एक-दूसरे को सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं."
हाल में जारी हुए अमेरिकी थिंक टैंक प्यू रिसर्च के वैश्विक व्यवहार सर्वे में यह बात सामने आई है, इसमें लोगों की धारणाओं, राय और विश्वास को मापा गया है.
सर्वे में भाग लेने वाले 91 फ़ीसदी पाकिस्तानी वयस्कों की राय भारत को लेकर प्रतिकूल रही. जबकि भारत में पाकिस्तान को लेकर नकारात्मक राय रखने वाले सर्वे में शामिल वयस्क 78 फ़ीसदी थे.
प्यू रिसर्च ने अपनी सर्वे रिपोर्ट में यह भी बताया है कि भारत और पाकिस्तान का यही रुख़ बीते एक दशक के सर्वेक्षणों में दिखता आया है.
ऐसे में सवाल है कि आख़िर क्यों दोनों देशों की एक-दूसरे को लेकर बदग़ुमानी ख़त्म नहीं होती?
इन दो पड़ोसियों पर क्या कहता है ग्लोबल सर्वे
एक-दूसरे को लेकर विरोध की भावना
भारत को लेकर
- 73% पाकिस्तानियों की बेहद ख़राब राय
- 18% पाकिस्तानियों की कुछ हद तक नकारात्मक राय
पाकिस्तान को लेकर
- 65% भारतीयों की बेहद ख़राब राय
- 16% भारतीयों की कुछ हद तक नकारात्मक राय
_____________________________________
अच्छे द्विपक्षीय संबंध बनाने के एक-दूसरे के इरादों पर अविश्वास
भारत सरकार को लेकर
- 57% भारतीय अपनी सरकार को प्रतिबद्ध मानते हैं
- 65% पाकिस्तानी, भारत को प्रतिबद्ध नहीं मानते
पाकिस्तान सरकार को लेकर
- 51% भारतीय, पाकिस्तान को प्रतिबद्ध नहीं मानते.
- 61% पाकिस्तानी अपनी सरकार को प्रतिबद्ध मानते हैं
_____________________________________
वर्ल्ड ऑर्डर को लेकर दोनों देशों में अलग राय
अमेरिका को लेकर -
- 45% भारतीय पॉज़िटिव, सिर्फ़ 15% पाकिस्तानी ही ऐसा सोचते हैं
- 39% भारतीयों को राष्ट्रपति ट्रंप पर विश्वास, मगर 12% पाकिस्तानी ही ऐसा सोचते हैं
चीन को लेकर
- 23% भारतीयों की ही राय अच्छी, जबकि 90% पाकिस्तानियों का अच्छा रुख़
- 25% भारतीयों को शी जिनपिंग पर विश्वास, मगर 83% पाकिस्तानी हैं सकारात्मक
रूस को लेकर
- 58% भारतीयों की अच्छी राय, जबकि 39% पाकिस्तानी ही ऐसा सोचते हैं
- 51% भारतीयों को राष्ट्रपति पुतिन पर विश्वास, मगर 32% पाकिस्तानी ही पॉज़िटिव
_____________________________________
प्यू रिसर्च सेंटर का यह सर्वे फरवरी-अप्रैल 2026 के दौरान 3,566 भारतीय वयस्कों से फ़ेस टू फ़ेस इंटरव्यू के आधार पर किया गया.
सर्वे 13 भारतीय भाषाओं में कराया गया और इसके रिज़ल्ट को राष्ट्रीय आबादी के अनुरूप बनाने के लिए सांख्यिकीय वेटिंग का उपयोग हुआ.
पाकिस्तान में यह सर्वे 8 अप्रैल से 7 मई 2026 के बीच 1,039 वयस्कों से समान मैथेडोलॉजी से किया गया. यह सर्वे पांच पाकिस्तानी भाषाओं में कराया गया.
प्यू रिसर्च सेंटर के 2013 से अब तक के सर्वेक्षणों में 20% से अधिक भारतीयों ने कभी भी पाकिस्तान को लेकर अच्छा रुख़ नहीं जताया.
वहीं, पाकिस्तान में भी भारत के प्रति दृष्टिकोण आमतौर पर नकारात्मक रहा है. पिछले सर्वेक्षणों में भारत के प्रति सकारात्मक राय रखने वालों का प्रतिशत सिंगल डिजिट से लेकर लगभग एक-तिहाई (33%) तक रहा है.
आपसी भरोसे में कमी क्यों?

इमेज स्रोत, Getty Images
इस सर्वे के नतीज़ों को लेकर बीबीसी न्यूज़ हिन्दी ने वरिष्ठ और जाने-माने राजनीतिक पत्रकार विनोद शर्मा से बात की.
विनोद शर्मा ने कहा, "एक ज़माना था जब पाकिस्तान में भारत विरोधी भावनाएं बहुत ज़्यादा थीं. हमारे देश में एक आकांक्षा थी कि हम रिश्ते ठीक करें. बात यह है कि एक ज़माने में एक स्ट्रॉन्ग लॉबी होती थी, जो 'पीस विद पाकिस्तान' वाली थी."
"वो लॉबी अब कमज़ोर हो गई है या अदृश्य हो गई है. क्योंकि जो लोग अपना मुकाम छोड़कर आए थे, वो जनरेशन लगभग समाप्त है और नई जनरेशन को पाकिस्तान के बारे में कुछ और ही सिखाया गया है."
वहीं, बीबीसी उर्दू के पूर्व पत्रकार सक़लैन इमाम का मानना है कि दोनों देशों के लोग पब्लिक में अपनी सही राय रखने से झिझकते हैं.
सक़लैन कहते हैं, "अगर आप किसी स्कूल, कॉलेज में, यूथ के बीच या प्रोफ़ेशनल ग्रुप में जाएंगे तो वहां ज़्यादातर लोग वही नैरेटिव बोलेंगे या वही राय रखेंगे, जो स्टेट की होती है. वो स्वतंत्र राय नहीं रखेंगे क्योंकि कोई विवाद में नहीं पड़ता चाहता."
रिश्तों में सुधार के प्रयासों पर एक-दूसरे से बदग़ुमान

इमेज स्रोत, Philip Brown/Getty Images
इस सर्वे में यह भी सामने आया कि दोनों ही देशों के लोग यह मानते हैं कि उनकी सरकार अपने पड़ोसी से अच्छे संबंध बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, मगर दूसरे देश की सरकार ऐसा नहीं चाहती.
इस पर वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा कहते हैं, "आज हमारे दोनों देशों में अमन और शांति की बात करना, जंग की बात करने से ज़्यादा मुश्किल हो गया है."
"आम लोगों के मन में एक-दूसरे के ख़िलाफ़ दुश्मनी पैदा कर दी गई है. आजकल हम लोकतंत्र के रूप में उतने अपरिपक्व लग रहे हैं, जितना पाकिस्तान है."
वहीं पत्रकार सक़लैन इमाम का कहना है कि पाकिस्तानी दोनों देशों के बीच व्यापार शुरू करने के पैरोकार हैं.
सक़लैन कहते हैं, "छोटे कारोबारी और व्यापारियों से जब बात होती है तो वो यह नहीं कहते कि भारत हमारा दोस्त है, लेकिन वो यह सब मानते हैं कि अगर पाकिस्तान को आर्थिक तौर पर तरक्की करनी है तो दोनों देशों को बातचीत करनी होगी और ट्रेड बढ़ानी होगी."
चीन को लेकर भारत-पाकिस्तान का रुख़

इमेज स्रोत, getty
सर्वे के मुताबिक़, भारत में चीन को लेकर नकारात्मकता और उसे खतरे के तौर पर देखे जाने की बात दिखती है. सर्वे में शामिल 21 प्रतिशत भारतीयों ने चीन को सबसे बड़ा ख़तरा माना.
जबकि सर्वे में शामिल 75 फ़ीसदी पाकिस्तानियों ने चीन को सबसे अहम सहयोगी बताया.
सक़लैन का कहना है, "पाकिस्तान को सबसे ज़्यादा समर्थन चीन से मिला है, चाहे वो वीटो (यूएन में) की बात हो, आर्थिक समर्थन की बात या टेक्नोलॉजी के सपोर्ट की बात हो, चीन आगे रहा है."
भारत और चीन के पारंपरिक रिश्तों को लेकर विशेषज्ञों के अलग रुख़ हैं.
सक़लैन का मानना है, "चीन पिछले दो या तीन दशक में एक बड़ी ताकत बनकर उभरा है. अगर आप इतिहास उठाकर देखेंगे तो 1962 की जंग से पहले चीन, भारत का दोस्त था."
साथ ही वह कहते हैं कि "भारत और पाकिस्तान के रिश्तों के बीच चीन कोई फ़ैक्टर नहीं है."
उधर, विनोद शर्मा का मानना है कि नेहरू के समय भी भारत सरकार, चीन को एक बड़ी चुनौती मानती थी.
विनोद शर्मा कहते हैं, "एक बार रॉ के पूर्व चीफ़ रामनाथ काओ (आरएन काओ) ने एक बार मुझे ज़िक्र किया था कि पंडित नेहरू के बारे में इतनी बातें की जाती हैं कि वह चीन से प्रेम करते हैं, यह गलत है. क्योंकि भारत की आज़ादी के बाद पहली इंस्पेक्टर जनरल की कॉन्फ्रेंस में पंडित नेहरू ने कहा था कि हमको ऐसा लगता हो कि हमारे लिए बड़ा चैलेंज पाकिस्तान है, लेकिन सच्चाई में हमारे लिए बड़ा चैलेंज चीन है."
अमेरिका को लेकर भारत-पाकिस्तान का रुख़

इमेज स्रोत, getty
प्यू सर्वे के अनुसार, भारत रूस और फिर अमेरिका पर सबसे अधिक भरोसा करता है, जबकि पाकिस्तान का भरोसा सबसे ज्यादा चीन और फिर रूस पर है.
ध्यान देने वाली बात यह है कि ये परिणाम ऐसे समय में आए हैं जब अमेरिकी राष्ट्रपति वैश्विक मंचों से पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका की तारीफ़ करते रहे हैं और भारत के ऊपर पिछले एक साल के भीतर कई बार टैरिफ़ लगा चुके हैं.
विनोद शर्मा इस बात से सहमत नहीं हैं कि आम पाकिस्तानी, अमेरिका को ख़तरा मानते हैं. बल्कि वे कहते हैं कि अमेरिका के लिए पाकिस्तान ही ईरान से युद्ध में मध्यस्थता के लिए वार्ता कर रहा है.
अमेरिका के लिए वे पाकिस्तान की जियो पॉलिटिकल हैसियत को अहम मानते हैं.
उन्होंने कहा, अमेरिका, पाकिस्तान से रिश्ते इसलिए रखना चाहता था कि अगर आप रीजन का नक्शा देखें तो इसकी एक महत्वपूर्ण भूमिका है. पाकिस्तान उनकी कठपुतली था. भारत उनका कभी क्लाइंट स्टेट (कठपुतली) नहीं रहा."
उधर, सक़लैन का कहना है कि भले आम पाकिस्तानी चीन को ज़्यादा पसंद करते हैं मगर उनका ख़्वाब अमेरिका जाकर रुपया कमाने का होता है.
रूस को लेकर विनोद शर्मा का कहना है, "अमेरिका मुफ़्त में कभी किसी को कुछ नहीं देता. रूस ने हमें बहुत कुछ दिया है. भारत को संतुलन बनाकर चलना चाहिए."
कैसे बिगड़ते गए भारत-पाकिस्तान संबंध

इमेज स्रोत, Sondeep Shankar/Getty Images
- 1999: पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की लाहौर यात्रा और लाहौर घोषणा-पत्र से शांति की उम्मीद जगी.
- मई 1999: कारगिल घुसपैठ के बाद दोनों देशों के रिश्ते फिर तनावपूर्ण हो गए.
- 2001: आगरा शिखर वार्ता किसी ठोस समझौते तक नहीं पहुंची.
- दिसंबर 2001: भारतीय संसद पर आतंकी हमले ने संबंधों को और खराब कर दिया.
- 2008: मुंबई 26/11 आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के बीच अविश्वास गहरा गया.
- 2015: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लाहौर यात्रा से रिश्तों में सुधार की उम्मीद बनी.
- जनवरी 2016: पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले ने शांति प्रक्रिया को झटका दिया.
- अप्रैल 2025: पहलगाम में चरमपंथी हमले के बाद तनाव एक बार फिर बढ़ गया.
- मई 2025: भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' और पाकिस्तान के जवाबी 'ऑपरेशन बुनयान अल मरसूस' के बाद सैन्य टकराव बढ़ा.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें
BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह
कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.






















