जीतेंद्र मिश्र होंगे अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ, 'ऑपरेशन सिंदूर' में थी अहम भूमिका

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अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे में चोरी के मामले के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पहली बार सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) की नियुक्ति की है.

इस पद के लिए ट्रस्ट ने वायु सेना के पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र को चुना है. जीतेंद्र मिश्र इसी साल मई में पश्चिमी वायु कमान के कमांडिंग इन चीफ़ के पद से रिटायर हुए थे.

राम मंदिर ट्रस्ट के कार्यकारी महामंत्री कृष्ण मोहन ने ट्रस्ट की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ़्रेंस में इस फ़ैसले की जानकारी दी.

बीते साल पहलगाम चरमपंथी हमले के बाद मई में जब भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष हुआ था, उस समय जीतेंद्र मिश्र पश्चिम वायु कमान के प्रमुख थे.

ट्रस्ट ने बोर्ड में तीन नए सदस्यों को भी जगह दी है. इनमें अयोध्या से मदन मोहन पांडे, दिल्ली से महेश भागचंदका और शिकोहाबाद से निर्मला यादव शामिल हैं.

मंदिर के चढ़ावे में चोरी के बाद 27 जून को ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. इसके बाद 6 जुलाई को ट्रस्ट की बैठक हुई थी.

इस बैठक में ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफ़ा स्वीकार किया गया था. उनकी जगह कृष्ण मोहन को अंतरिम महामंत्री बनाया गया था.

बुधवार को ट्रस्ट के फ़ैसलों के बारे में जानकारी देते हुए कृष्ण मोहन ने ये भी बताया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज को अब महामंत्री बनाया गया है. वहीं महेश भागचंदका को कोषाध्यक्ष की ज़िम्मेदारी दी गई है.

कृष्ण मोहन ने बताया कि एक अगस्त 2026 को सीईओ की चयन समिति ने ट्रस्ट के सामने तीन नामों को रखा था. इन तीनों नामों पर बुधवार को ट्रस्ट की बैठक में चर्चा हुई थी.

उन्होंने बताया कि ये तीनों लोग अलग-अलग क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं. इनमें पहले शख़्स रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र, दूसरे रिटायर्ड मेजर जनरल संजय पी विश्वासराव और तीसरे श्रुति भारद्वाज थे. इनमें रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र के नाम को तय किया गया है.

उन्होंने बताया कि जीतेंद्र मिश्र देवरिया ज़िले से हैं और मध्यम वर्गीय परिवार से संबंध रखते हैं.

कौन हैं जीतेंद्र मिश्र

पीआईबी के मुताबिक़, एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र ने 1 जनवरी 2025 को भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख का पद संभाला था.

एयर मार्शल मिश्र 6 दिसंबर 1986 को लड़ाकू विमान के पायलट के रूप में भारतीय वायुसेना में शामिल हुए थे.

उन्होंने पुणे स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, बेंगलुरु स्थित एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल, अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज से प्रशिक्षण लिया है. वो फाइटर कॉम्बैट लीडर और प्रायोगिक टेस्ट पायलट हैं. उन्हें 3,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है.

38 साल से अधिक लंबे सेवा करियर में एयर मार्शल मिश्र ने कई महत्वपूर्ण कमांड और स्टाफ़ पदों पर काम किया है.

एयर मार्शल मिश्र को 'अति विशिष्ट सेवा मेडल' और 'विशिष्ट सेवा मेडल' से सम्मानित किया जा चुका है.

'ऑपरेशन सिंदूर' में भूमिका के लिए साल 2025 में उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (एसवाईएसएम) से सम्मानित किया गया था.

'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर क्या बोले थे?

उनके करियर में सबसे अहम मोड़ बीते साल भारत और पाकिस्तान का सैन्य संघर्ष था. भारत ने अपने सैन्य अभियान को 'ऑपरेशन सिंदूर' का नाम दिया था.

26 अगस्त को एएनआई के साथ एक ख़ास इंटरव्यू में जीतेंद्र मिश्र ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर बात की.

'ऑपरेशन सिंदूर' की तैयारी को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि "26 अप्रैल 2025 को पहलगाम हमले के बाद उसी दिन देर रात मैंने वायुसेना प्रमुख को फ़ोन करके बता दिया था कि अगर सरकार सैन्य विकल्पों को लेकर फ़ैसला करती है तो मैं अपने प्लान के साथ तैयार हूं."

"सैन्य बल शांति काल में तैयारियां करती हैं. हम ख़ुफ़िया जानकारियों, अंतरिक्ष की तस्वीरों, ग्राउंड की ख़ुफ़िया जानकारियों को लेकर हज़ारों लक्ष्य की योजना बनाए रखते हैं. अगर सरकार हमें उन लक्ष्यों को निशाना बनाने की अनुमति देती है तो हम कुछ ही घंटों में उन लक्ष्यों पर हमला कर देंगे."

"ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बेहद ठोस ख़ुफ़िया जानकारियों पर भरोसा किया, जैसे कि किस इमारत में कितने लोग हैं. ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन के हमले से सरकार के निर्देश बिलकुल साफ़ थे कि आंतकवादी, उनके हैंडलर और उनके समर्थकों को सज़ा मिलना चाहिए, न कि पाकिस्तान के आम आदमी को."

"आपको हैरत होगी कि हमारे हमले का समय 6-7 मई की दरमियानी रात को एक बजे था. कोई भी आम आदमी उस समय मरकज़ या मस्जिद में नहीं बैठा होगा. हमने स्थानीय लोगों वाले मदरसों को छोड़कर उन जगहों को ठोस ख़ुफ़िया जानकारी के आधार पर निशाना बनाया जहां आतंकवादी और उनके हैंडलर्स थे."

कौन हैं निर्मला यादव

उत्तर प्रदेश के शिकोहाबाद की रहने वालीं निर्मला यादव ट्रस्ट में शामिल की गईं पहली महिला हैं. इस पर स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा, "हमें खास तौर पर ख़ुशी है कि ट्रस्ट में अब महिलाओं को भी शामिल किया गया है. हमारा मानना है कि इस मातृशक्ति के आने से देवी सीता जी बहुत खुश होंगी. हमें उम्मीद है कि अब हमें उनकी पूरी कृपा और मां जैसा प्यार मिलेगा."

विश्व हिंदू परिषद के ज्वाइंट जनरल सेक्रेटरी डॉ. सुरेंद्र जैन के मुताबिक़, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में सदस्य के तौर पर शामिल की गईं. निर्मला यादव एकेडमिशियन रही हैं. उन्होंने करीब 15 साल तक एक कॉलेज की प्रिंसिपल के तौर पर काम किया. इसके बाद उन्होंने विश्वविद्यालय में भी प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं.

सुरेंद्र जैन के मुताबिक़, निर्मला यादव महिलाओं के सशक्तीकरण से जुड़े सामाजिक कार्यक्रमों में भी सक्रिय रही हैं.

हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि निर्मला यादव की विश्व हिंदू परिषद में कोई औपचारिक पद या विशेष ज़िम्मेदारी नहीं रही है. उन्होंने बताया कि निर्मला यादव अलग-अलग सामाजिक संगठनों के कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेती रही हैं और विश्व हिंदू परिषद के कार्यक्रमों में भी उनका आना-जाना रहा है.

ट्रस्ट में उनकी नियुक्ति को लेकर सुरेंद्र जैन ने कहा कि इससे राम मंदिर के संचालन में महिलाओं की सहभागिता बढ़ेगी और उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव का भी लाभ मिलेगा.

ट्रस्ट ने सीईओ के लिए 16 लोगों का लिया था इंटरव्यू

राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी विवाद के बाद ट्रस्ट ने सीईओ के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे. सीईओ का काम प्रबंधन और वित्तीय मामलों को देखना होगा.

सीईओ के चयन के लिए इसी महीने हुए इंटरव्यू को लेकर भी ख़ासी चर्चा रही.

ट्रस्ट की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ में बताया गया था कि एक उच्चस्तरीय पैनल ने 5,585 आवेदनों में से चुने गए 16 उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया.

पैनल ने इनमें से तीन का नाम ट्रस्ट को भेजा था जिसमें अंतिम फ़ैसला ट्रस्ट को करना था.

सर्च कमेटी में न्यायमूर्ति (रिटायर्ड) प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) वी.के. चतुर्वेदी (वेटरन) और परमाणु वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हवारे शामिल थे.

इंटरव्यू में धार्मिक कार्यों के अनुभव, भगवान राम में आस्था और हिंदू धर्म की मूल धार्मिक परंपराओं से जुड़े सवाल पूछे गए.

इंटरव्यू के दौरान यह भी पूछा गया कि क्या उम्मीदवार चोटी रखते हैं, जनेऊ पहनते हैं, शुद्ध शाकाहारी हैं या मांसाहारी, शराब का सेवन करते हैं या नहीं, कट्टर हिंदू हैं या केवल आस्थावान, क्या वे हिंदू धर्म के अनुरूप वस्त्र पहनने में सहज होंगे और अन्य धर्मों के बारे में उनकी क्या राय है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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