कैसे सांस लेते हैं सुमो पहलवान?

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सुमो पहलवानों का खाना-पीना, जीना और यहां तक कि सांस लेना तक सब जापानी है.

जापान, सुमो पहलवान
इमेज कैप्शन, सुमो कुश्ती की परंपरा जापान में सदियों पुरानी है. नागोया शहर के एक बौद्ध मठ में कुछ सुमो पहलवान हर सुबह तीन घंटे से ज्यादा समय प्रैक्टिस करते हैं.
जापान, सुमो पहलवान
इमेज कैप्शन, कहते हैं कि सुमो पहलवानों की दुनिया में जाने का मतलब किसी का हर तरह से जापानी हो जाना होता है.
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इमेज कैप्शन, सुमो पहलवानों का खाना-पीना, जीना और यहां तक कि सांस लेना तक सब जापानी है. उनकी चोटी से लेकर समुदाय में पदानुक्रम तक.
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इमेज कैप्शन, लेकिन कड़े प्रशिक्षण और पारंपरिक बंदिशों के कारण जापानी युवा सुमो की कला से दूर हो रहे हैं और इसका नतीज़ा भी सामने दिख रहा है.
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इमेज कैप्शन, आज हालात ऐसे बन गए हैं कि जापानियों के वर्चस्व वाले इस खेल में विदेशियों का दबदबा है. अब सुमो पहलवानी के अखाड़े में मंगोलियाई खिलाड़ियों का बोलबाला है.
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इमेज कैप्शन, सुमो पहलवानों की जीवनशैली को लेकर भी लोगों में बहुत उत्साह रहता है. जापान में सुमो के खेल का एक आध्यात्मिक पहलू भी है.
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इमेज कैप्शन, ज्यादातर ट्रेनिंग सेंटर बौद्ध मठों से जुड़े हुए हैं. साढ़े दस बजे सुबह जब उनकी ट्रेनिंग खत्म होती है तो सुमो पहलवान अपने प्रशंसकों से घिर जाते हैं.
जापान, सुमो पहलवान
इमेज कैप्शन, बच्चे उनसे ऑटोग्राफ़ लेते हैं, फैंस उनके साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं और इन सब चीजों के बाद सुमो पहलवानों को दिन में पहली बार खाना खाते हैं.
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इमेज कैप्शन, सुमो पहलवानों की दो वक्त की खुराक तय रहती है और उनका खाना जूनियर पहलवान तैयार करते हैं. कहा जाता है कि उन्हें रोज़ाना 8000 कैलोरी ऊर्जा की ज़रूरत पड़ती है.
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इमेज कैप्शन, पहलवान खाना खाने के बाद फौरन कुछ घंटों के लिए सो जाते हैं, सांस लेने में सुविधा के लिए वे मास्क का इस्तेमाल करते हैं. सभी तस्वीरें और कैप्शन: समाचार एजेंसी रॉयटर्स