गुरुवार, 20 मार्च, 2008 को 09:30 GMT तक के समाचार
अमरीका स्थित मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने नेपाल की राजधानी काठमांडू में प्रदर्शन कर रहे तिब्बती लोगों पर बल प्रयोग करने के लिए नेपाल सरकार की निंदा की है.
इसके जवाब में नेपाल सरकार ने कहा है कि राजधानी काठमांडू में चीन विरोधी प्रदर्शनों को रोकने के लिए उसके पास इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं था.
ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार नेपाल में रह रहे तिब्बती अक्सर तिब्बत में चीन के शासन के ख़िलाफ़ रैलियाँ आयोजित करते रहते हैं.
संगठन ने बताया कि पुलिस अक्सर प्रदर्शनकारियों को डंडों से पीटती है, उन पर आंसू गैस छोड़ती है या उनके सिर पर चोट पहुँचाती है.
संगठन ने अपने बयान में बताया है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने एक प्रदर्शनकारी को इतना पीटा कि उसके दोनों पैर टूट गए.
पुलिस ने एक बौद्ध भिक्षु को धमकी दी है कि अगर उन्होंने भविष्य में किसी प्रदर्शन में भाग लिया तो उन्हें चीन भेज दिया जाएगा.
बंद हो बल प्रयोग
ह्यूमन राइट्स वॉच ने नेपाल सरकार से मांग की है कि वह प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग और उनकी गिरफ़्तारियाँ बंद करे.
नेपाल के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता मोदराज धोतेल ने बताया कि पुलिस से मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं करने के लिए कहा गया है.
उन्होंने कहा कि नेपाल चीन विरोधी प्रदर्शन की इजाज़त नहीं दे सकता, क्योंकि नेपाल सरकार "एक चीन" की नीति को मानती है.
धोतेल ने कहा कि हम अपनी सीमाओं में बंधे हुए हैं.
पिछले सप्ताह नेपाल पुलिस ने बीबीसी को बताया था कि उसे चीनी अधिकारियों से नेपाल में चीन विरोधी प्रदर्शनों की इजाज़त नहीं देने के अनुरोध मिलते रहते हैं.
बीबीसी संवाददाता ने एक प्रदर्शन के दौरान नेपाली लोगों और तिब्बती प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हाथापाई खुद देखी थी.
नेपाल में रहने वाले तिब्बती शरणार्थी तिब्बत में चीनी शासन के ख़िलाफ़ एक बौद्ध विहार और संयुक्त राष्ट्र के नेपाल स्थित कार्यालय के बाहर रैली करते रहते हैं.
इन शरणार्थियों ने पिछले 10 दिनों में कम से कम छह प्रदर्शन किए हैं.