गुरुवार, 25 अक्तूबर, 2007 को 14:35 GMT तक के समाचार
दिवंगत अमरीकी पत्रकार डेनियल पर्ल की पत्नी मैरियन पर्ल ने पाकिस्तान के सबसे बड़े हबीब बैंक के ख़िलाफ़ मुक़दमा वापिस ले लिया है.
मैरियन पर्ल ने जुलाई 2007 में यह कहते हुए हबीब बैंक के ख़िलाफ़ मुक़दमा दायर किया था कि बैंक ने वो धन एक इस्लामी चैरिटी को दे दिया जो मैरियन के अनुसार उनके पति की मौत से जुड़ा हुआ था.
हबीब बैंक ने मैरियन पर्ल के इन आरोपों का खंडन किया है. अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि मैरियन पर्ल ने यह मुक़दमा क्यों वापस लिया.
ग़ौरतलब है कि वॉल स्ट्रीट जर्नल के पत्रकार डेनियल पर्ल का जनवरी 2002 में कराची में अपहरण कर लिया गया था और बाद में उनकी हत्या कर दी गई थी.
डेनियल पर्ल पाकिस्तान में इस्लामी चरमपंथियों पर अपने अख़बार वॉल स्ट्रीय जर्नल के लिए काम करने आए थे.
ब्रितानी नागरिक अहमद उमर सईद शेख़ को डेनियल पर्ल के अपहरण और हत्या के आरोप में पाकिस्तान में मौत की सज़ा सुनाई जा चुकी है.
अमरीका का कहना है कि सितंबर 2001 के हमलों की साज़िश रचने के अभियुक्त ख़ालिद शेख़ मोहम्मद ने जाँचकर्ताओं को बताया कि वास्तव में उसने डेनियल पर्ल की गला काटकर हत्या की थी.
मैरियन पर्ल ने अपने मुक़दमे में इन दोनों व्यक्तियों यानी अहमद उमर सईद शेख़ और ख़ालिद शेख़ मोहम्मद के साथ-साथ अल क़ायदा को भी पार्टी बनाया था.
'बिल्कुल ग़लत'
ऐसी ख़बरें मिली हैं कि मंगलवार को मैरियन पर्ल ने इस मुक़दमे की सुनवाई कर रही अमरीकी अदालत को सूचना दी कि वह अपना मुक़दमा वापिस ले रही हैं. मुक़दमा वापिस लेने के लिए कोई वजह नहीं बताई गई है.
बाद में मैरियन पर्ल के वकीलों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "मुक़दमा कुछ निजी कारणों से वापिस लिया गया है और उन कारणों का मुक़दमे के समर्थन में दलीलों या सबूतों से कुछ लेना-देना नहीं है."
पाकिस्तान का हबीब बैंक इन सभी आरोपों का खंडन करता रहा है. बैंक के वरिष्ठ कार्यकारी उपाध्यक्ष ज़फ़र अज़ीज़ उसमानी ने जुलाई 2007 में ही कहा था, "ये आरोप बिल्कुल ग़लत हैं. एक वित्तीय संस्थान के तौर पर हमने कभी भी आतंकवादी संगठनों का कोई सहयोग नहीं किया है."
ज़फ़र अज़ीज़ उसमानी ने कहा था कि जिस समय डेनियल पर्ल की हत्या की गई उस समय हबीब बैंक का मालिकाना हक़ पाकिस्तान सरकार के पास था "जो ऐसी किसी कार्रवाई में शामिल नहीं हो सकता."
उसमानी ने कहा है कि मैरियन पर्ल ने न्यूयॉर्क की अदालत में जो मुक़दमा दायर किया था उसमें उनके पास कोई सबूत नहीं थे.
मेरियन पर्ल ने न्यूयॉर्क में दायर इस मुक़दमे में आरोप लगाया था कि कराची स्थित हबीब बैंक ने जानबूझकर अल रशीद ट्रस्ट के साथ वित्तीय लेनदेन किया था जिसके कुछ "आतंकवादी गुटों" से संबंध हैं.