शनिवार, 25 अगस्त, 2007 को 18:07 GMT तक के समाचार
अफ़ग़ानिस्तान के बामियान में तालेबान शासन के दौरान ध्वस्त की गई गौतम बुद्ध की मूर्तियों के अवशेषों को जोड़कर फिर से बुद्ध की प्रतिमा को खड़ा करने की कोशिशों पर सरकार और देशवासियों में कई तरह के विचार हैं.
छठी शताब्दी में बनी इन बुद्ध प्रतिमाओं को उस समय बनाया गया था जब वहाँ बामियान बौद्धों का व्यापार केंद्र हुआ करता था.
इन सदियों में इन प्रतिमाओं का वैसे ही काफ़ी ह्रास हो चुका था लेकिन इस धरोहर को तालेबान ने मार्च 2001 में दुनिया भर में भारी विरोध के बावजूद तोप के गोलों से तोड़ डाला था.
बामियान की ये बेजोड़ प्रतिमाएँ तालेबान शासकों ने यह कह कर तोड़ दी थीं कि ये ग़ैर-इस्लामी है. ध्वस्त की गई दो प्रतिमाएँ 55 और 39 मीटर ऊँची थीं.
अब इन प्रतिमाओं कुछ हिस्से को समेट कर उसे फिर से प्रतिमा का आकार देने पर विचार किया जा रहा है. ध्वस्त मूर्तियों के स्थान से आधा किलोमीटर दूर ही बुद्ध की 38 मीटर ऊँची प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव है.
संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक मामलों की संस्था यूनेस्को ने बामियान में गौतम बुद्ध की मूर्ति को अंतरराष्ट्रीय धरोहर घोषित किया था. इससे इन प्रतिमाओं के पुनर्निमाण का तर्क और मज़बूत होता है.
इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ मान्यूमेंट्स एंड साइट्स के सदस्य जार्जिस टुबेकिस और उनके सहयोगी ध्वस्त मूर्तियों के अवशेषों की पहचान के काम में लगे हैं.
उनका कहना है, “अब भी कई महत्वपूर्ण अवशेष बचे हैं जिन्हें जोड़कर नई मूर्ति को आकार देने में काफ़ी मदद मिल सकती है लेकिन मूर्ति के पुनर्निर्माण पर फ़ैसला तो ख़ुद अफ़गानिस्तान सरकार को करना होगा.”
उत्साह
नई प्रतिमा का निर्माण यूनेस्को के मानदण्ड के दायरे में भी किया जाना ज़रूरी है.
बामियान में हाजरा समुदाय के शिया मुस्लिम युवक नासिर मुदाबीर का कहना है, "मेरा मानना है कि बामियान बुद्ध मूर्ति का पुनर्निर्माण करने के बजाय उन अवशेषों को यादगार के तौरपर संरक्षित कर दिया जाना जाहिए."
बामियान के ऐतिहासिक स्मारकों के निदेशक पद पर तैनात मुदाबीर कहते हैं, "पुनर्निर्माण के बावज़ूद वह असली बुद्ध की प्रतिमा नहीं हो सकती और यह एक तरह से तालेबान के क्रूर इतिहास पर परदा डालने जैसा होगा."
लेकिन बामियान शहर कई वर्ष बाद आज फिर से जीवंत नज़र आता है. शहर के मुख्य बाज़ार में ध्वस्त प्रतिमाओं से खाली हुआ आसमान छूता स्थान साफ़ नजर आता है.
बाज़ार में एक व्यापारी अहमदुल्ला कहते हैं कि प्रतिमाओं को फिर से बनाया जाना चाहिए क्योंकि ये बामियान और अफ़गानिस्तान का इतिहास बयान करती हैं.
रोहुल्ला मोसावी नामक युवक ने कहा कि मूर्तियों का पुनर्निर्माण बामियान और अफ़गानिस्तान के हक़ में होगा.
बामियान की गवर्नर हबीबा सराबी का कहना है कि कम से कम एक ही बौद्ध प्रतिमा का निर्माण कर दिया जाना चाहिए, क्योंकि यह यहाँ के लोगों के जीवन का हिस्सा है. साथ ही इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा.
पुनर्निर्माण को लेकर यूनेस्को हर साल दिसंबर में अफगान सरकार के साथ बैठक करता है, जिसमें विशेषज्ञों द्वारा खोजे गए अवशेषों के आधार पर मूर्तियों को बनाने की संभावना पर विचार होता है.
हालांकि अभी तक इन मूर्तियों को फिर से स्थापित किए जाने पर कोई निर्णय नहीं हुआ है. जब तक इस बारे में कोई निर्णय नहीं होता है, बामियान में बुद्ध प्रतिमाओं के स्थल आकर्षण और चर्चा का केंद्र ज़रूर बने हुए हैं.