सोमवार, 26 मार्च, 2007 को 12:37 GMT तक के समाचार
भारत ने कश्मीर में हो रही हिंसा को भारत-पाक के साझा आतंक-विरोधी तंत्र से बाहर रखने की पाकिस्तान की माँग को मानने से इनकार कर दिया है.
भारत ने कहा है कि इस तरह की कोई भी माँग बहुत ही असंगत है.
छह-सात मार्च को इस्लामाबाद में हुई आतंकवाद विरोधी तंत्र की बैठक में पाकिस्तान ने कहा था कि कश्मीर को इस दायरे से बाहर रखना चाहिए क्योंकि वो एक 'विवादित' क्षेत्र है.
भारत के विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने स्पष्ट किया कि इस साझा पहल का मकसद आतंकवाद को रोकना है और इस कोशिश में कोई भी क्षेत्र छोड़ा नहीं जा सकता क्योंकि आतंकवादी किसी भी सीमा को नहीं मानते.
समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में विदेश मंत्री ने बताया, "इस प्रक्रिया में किसी भी क्षेत्र को छोड़ना बहुत ही असंगत होगा क्योंकि आतंकवादी किसी भी क्षेत्रीय सीमा का सम्मान नहीं करते."
विदेश मंत्री ने ज़ोर देते हुए कहा कि जहाँ भी आतंकवाद होगा वहाँ दोनों देश मिलकर संघर्ष करेंगे.
पाकिस्तान की तरफ से इस तरह की माँग पर प्रणब मुखर्जी ने कहा, "उन्होंने अपनी राय दी है. समय के साथ-साथ सारे मुद्दों को सुलझा लिया जाएगा."
आतंक-विरोधी तंत्र
आतंक-विरोधी तंत्र का गठन पिछले साल किया गया था जब भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ हवाना में हुए गुटनिरपेक्ष देशों के सम्मेलन में मिले थे.
इस आतंक-विरोधी तंत्र के तहत तय हुआ था कि भारत और पाकिस्तान आतंकवाद पर अपनी सूचनाएँ आपस में बाँटेंगे, हमलों से जुड़े लोगों को पकड़वाने में मदद करेंगे और साथ ही भविष्य में होने वाले हमलों को रोकने की कोशिश करेंगे.
तीन अप्रैल से भारत में शुरू हो रहे सार्क सम्मेलन में आतंकवाद बहस का बड़ा मुद्दा होगा.
अफ़गानिस्तान पहली बार आठवें सदस्य की तरह सार्क सम्मेलन में हिस्सा लेगा.