कर्नाटक में कम से कम पिछले पाँच दशकों में पहली बार पूरी तरह पुरुषों वाला मंत्रिमंडल बना है.
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोमवार को अपने 14-सदस्यीय मंत्रिमंडल में 19 और सदस्यों को शामिल किया. लेकिन इनमें एक भी महिला को प्रतिनिधित्व नहीं मिला.
पार्टी हाईकमान की दी गई सूची में एक महिला का नाम शामिल था, लेकिन शपथ ग्रहण समारोह से लगभग दो घंटे पहले गायत्री शांतिगौड़ा का नाम सूची से हटा दिया गया.
इसके पीछे तर्क यह दिया गया कि उन्हें अभी तक विधान परिषद की सदस्य के रूप में शपथ नहीं दिलाई गई है.
दूसरा कारण यह था कि उन्हें कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश के बाद केवल शुक्रवार को ही निर्वाचित घोषित किया गया था.
शांतिगौड़ा अदालत गई थीं क्योंकि चिक्कमगलुरु स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र में उनके बीजेपी प्रतिद्वंद्वी प्राणेश छह मतों के अंतर से विजयी घोषित हुए थे.
मामला उनके पक्ष में गया क्योंकि नगरपालिकाओं के 12 मनोनीत सदस्यों ने, जिन्हें निर्वाचक होने का अधिकार नहीं था, प्राणेश के पक्ष में मतदान किया था.
एक दूसरा राजनीतिक कारण यह भी था कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शांतिगौड़ा को मंत्री बनाए जाने पर आपत्ति जताई थी, क्योंकि इस बारे में उनसे कोई सलाह नहीं ली गई थी. शांतिगौड़ा और सिद्धारमैया दोनों एक ही समुदाय, कुरुबा (चरवाहा) समुदाय, से आते हैं.
हालांकि, सिद्धारमैया ने शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा नहीं लिया. इससे पार्टी के भीतर कई तरह के राजनीतिक संकेत गए. एक वरिष्ठ विधायक ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, "यह साफ़ है कि अपने समर्थकों को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से वह खुश नहीं हैं. साथ ही आज उनका जन्मदिन भी था और उन्हें बधाई देने के लिए बड़ी संख्या में समर्थक उनके घर पहुंचे थे.
केपीसीसी अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने बीबीसी न्यूज़ हिंदी से कहा, "एक और मंत्रिमंडल पद अभी भरा जाना बाकी है. हम निश्चित रूप से एक महिला को शामिल करेंगे. यह पूरी तरह पुरुषों वाला मंत्रिमंडल नहीं रहेगा. आप निश्चिंत रहें. हमारे पास पर्याप्त महिला सदस्य हैं."
224 सदस्यीय विधानसभा में राज्य मंत्रिमंडल में अधिकतम 34 मंत्री हो सकते हैं. सोमवार को शामिल किए गए 19 मंत्रियों की सूची को पार्टी हाईकमान ने पूरी तरह मंजूरी दी थी.
शामिल किए गए मंत्रियों में बी जेड जमीर अहमद खान भी हैं, जिन पर दावणगेरे दक्षिण विधानसभा सीट के उपचुनाव में पार्टी के ख़िलाफ़ काम करने का आरोप लगाया गया था.
इसके अलावा बी. नागेंद्र को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया, जिन्हें कर्नाटक वाल्मीकि डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के अध्यक्ष रहते हुए कथित गबन के आरोप में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ़्तार किया था.