अफ़ग़ानिस्तान: ये नशा है, नाम है 'नसवार'...

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अफ़ग़ानिस्तान में नसवार के इस्तेमाल का चलन जोरों पर है. इसे तंबाकू, चूना, लकड़ी के बुरादे से तैयार किया जाता है.

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इमेज कैप्शन, डॉक्टरों का कहना है कि इसके सीधे इस्तेमाल से फेफड़े, पेट और मुंह का कैंसर होने का ख़तरा है. इनके अलावा किडनी, दिल और दूसरी बीमारियों का भी ख़तरा है. अफ़ग़ानिस्तान के कंधार शहर में एक शख़्स सड़क किनारे नसवार बेचते हुए.
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इमेज कैप्शन, अफ़ग़ानिस्तान में नशे के लिए नसवार का इस्तेमाल आम है. अफ़ग़ानिस्तान के अलावा पाकिस्तान के ख़ैबर पख्तूनख्वाह और अन्य कबायली इलाकों में लोग इसका इस्तेमाल करते हैं.
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इमेज कैप्शन, इसे तंबाकू, चूना, लकड़ी के बुरादे से तैयार किया जाता है. नसवार का इस्तेमाल करने वाले लोग हर उम्र के हैं, इनमें छोटी उम्र के लड़कों से लेकर बुजुर्गवार लोग भी है.
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इमेज कैप्शन, डॉक्टरों का कहना है कि नसवर के इस्तेमाल का नुक़सान धूम्रपान से भी ज्यादा ख़तरनाक हो सकता है.
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इमेज कैप्शन, नसवार का इस्तेमाल कुछ कुछ उसी तरह से किया जाता है जैसे भारत में लोग तंबाकू या खैनी खाते हैं.
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इमेज कैप्शन, कहते हैं कि नसवार का इस्तेमाल सबसे पहले पश्चिमी यूरोप में दवा के तौर पर किया जाता था लेकिन बाद में दक्षिणी एशिया और मध्य एशिया में लोग इसे नशे के लिए लेने लगे. तुर्कमेनिस्तान ने 2008 में इस पर प्रतिबंध लगा दिया था.
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इमेज कैप्शन, नसवार का चलन रूस में भी है. जानकार बताते हैं कि इस नशे से निजात पाने में लोगों को बहुत परेशानी होती है और इससे मुंह और गले की कई बीमारियां होती हैं.