पीएम मोदी चीन से पहले वियतनाम क्यों गए

मोदी वियतनाम में
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत और वियतनाम की रणनीतिक साझेदारी को समग्र रणनीतिक सहयोग में तब्दील करने के फ़ैसले से भविष्य के संबंधों का रास्ता तय होगा.

वियतनाम के एक दिन के दौरे पर गए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "इससे हमारे द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा, गति और अर्थ मिलेगा."

मोदी की मौजूदगी में दोनों देशों के बीच 12 समझौतों पर दस्तख़्त हुए. भारत रक्षा सहयोग को बढ़ाते हुए वियतनाम को 50 करोड़ अमरीकी डॉलर का ऋण देगा.

दोनों देशों के बीच साल 2017 को 'दोस्ती के साल' के रूप में मनाए जाने की भी घोषणा की गई है.

मोदी बीते एक दशक में वियतनाम की यात्रा करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं.

मोदी वियतनाम से चीन जाएंगे, जहां वो हांगज़ो में रविवार और सोमवार को होने वाली जी-20 बैठक में हिस्सा लेंगे.

साउथ चाइना सागर

चीन के साउथ चाइना सागर में प्रभुत्व स्थापित करने की कोशिशों से जुड़े विवाद के बीच मोदी के वियतनाम जाने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. वो भी तब जब उन्हें इसके बाद चीन जाना है.

जानकारों का कहना है कि साउथ चाइना सागर में चीन के विस्तार के कारण वियतनाम दबाव में है और मोदी के इस कदम को भारत और वियतनाम के बीच बढ़ती दोस्ती और साझेदारी के रूप में देखा जा रहा है.

इसी साल जुलाई में <link type="page"><caption> अंतरराष्ट्रीय अदालत</caption><url href="http://sauida.shop/hindi/international/2016/07/160712_china_sea_international_court_sr%22 platform="highweb"/></link> ने कहा था कि ऐसे कोई ऐतिहासिक सबूत नहीं हैं कि चीन का इस समुद्र और इसके संसाधनों पर एकाधिकार रहा है. चीन ने अदालती कार्रवाई को 'ढोंग' बताते हुए खारिज कर दिया था.

मोदी जिनपिंग

इंडियन काउँसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (आईसीडब्ल्यूए) के फेलो और दक्षिण पूर्व एशिया मामलों के जानकार राहुल मिश्रा ने बीबीसी संवाददाता निखिल रंजन को बताया कि प्रधानमंत्री मोदी चीन जाने से पहले वियतनाम गए, चीन भी ऐसा करता रहा है, चीन के नेता भारत दौरे से पहले पाकिस्तान जाते रहे हैं.

वे बताते हैं कि मोदी को लाओस में दक्षिण एशिया शिखर सम्मेलन की बैठक में शिरकत के लिए जाना ही था, लेकिन अगर चीन से जुड़ा पहलू इसमें शामिल है तो ये अच्छा सामरिक संदेश देने का प्रयास है.

राहुल मिश्रा कहते हैं, "दशकों से वियतनाम सैन्य और सामरिक महत्व का सहयोगी रहा है. माना जा रहा है कि मोदी चीनी राष्ट्रपति से न्यूक्लियर्स सप्लायर्स ग्रुप यानी एनएसजी में <link type="page"><caption> भारत की सदस्यता</caption><url href="http://sauida.shop/hindi/international/2016/06/160608_india_nsg_status_tk%22 platform="highweb"/></link> के समर्थन के संबंध में बात करेंगे.

उनकी राय में दोनों देशों के बीच मोल-तोल की स्थिति नहीं है. भारत को चीन से बहुत सारी चीज़ें चाहिए लेकिन वो बहुत कुछ देने की स्थिति में नहीं हैं.

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