कश्मीर: 'कनपटी पर बंदूक रखकर स्टैंड न बदलेगा'

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    • Author, ज़ुबैर अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
  • प्रकाशित

भारत प्रशासित कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के बड़े बेटे नईम शाह गिलानी को उनके बैंक खातों के सिलसिले में एनआईए ने पूछताछ के लिए बुलाया है.

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने हुर्रियत नेता गिलानी के बेटे को उनके बैंक खातों में कथित रूप से विदेश से आए फंड के बारे में पूछताछ के लिए बुलाया है.

इसकी पुष्टि करते हुए नईम गिलानी ने बीबीसी को बताया कि उन्हें एनआईए का समन सोमवार को मिला. उन्होंने कहा कि वो मंगलवार को एएनआई के दफ्तर जाएंगे.

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नईम गिलानी ने कहा कि उन्हें एनआईए से बुलावे पर बहुत हैरानी हुई है. उन्होंने कहा, "मैं तो सियासी आदमी हूँ भी नहीं. मैं तो एक डॉक्टर हूँ. फिर मुझे क्यों बुलाया है?''

ख़बरों के मुताबिक़ एनआईए उनसे उनके बैंक खातों में आए कथित विदेशी पैसों के बारे में पूछना चाहती है. सरकार दावा करती रही है कि कश्मीर में पत्थर फेंकने वालों को विदेशी पैसे दिए गए हैं.

नईम गिलानी ने कहा, ''अगर सरकार उनके खाते के बारे में जानना चाहती है तो वो सहयोग के लिए तैयार हैं. मेरा एक ही बैंक अकाउंट है जिसमें केवल 31 हज़ार रुपए हैं. यह मेरे पिता को कमज़ोर करने की भारत सरकार की एक चाल है. इसमें उन्हें कामयाबी नहीं मिलेगी.''

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हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के प्रवक्ता और सैयद गिलानी के दामाद अल्ताफ अहमद शाह ने बीबीसी से कहा कि गिलानी साहब इस तरह के दबाव में आने वाले नहीं है. उन्होंने भारत सरकार की बात करते हुए कहा, "आप कनपटी पर बंदूक रख कर गिलानी साहब को कह रहे हैं कि वो नरम रवैया रखें. अपने स्टैंड में नरमी लाइए. ऐसा नहीं होता."

अल्ताफ शाह के मुताबिक़, "भारत सरकार मिले-जुले इशारे दे रही है. एक तरफ सरकार कहती है कि वो कश्मीर में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजेगी और दूसरी तरफ हमारे लोगों को तंग कर रही है. ऐसे में इनसे कौन बात करेगा?"

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कश्मीर में आठ जुलाई को हिज्बुल मुजाहिदीन के कथित कमांडर बुरहान वानी की पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत के बाद से प्रदर्शन और हिंसा जारी है. इसमें अब तक 65 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और सैकड़ों सुरक्षाकर्मियों समेत कई घायल हुए हैं. इनमें से दर्जनों की पैलेट गन से चोट लगने के कारण आँखों की रोशनी चली गई है.

हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस ने उस समय से जो आम हड़ताल बुलाई थी वो अब तक जारी है. हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी समेत पार्टी के सभी बड़े नेता अपने घरों में नज़रबंद हैं.

अल्ताफ शाह कहते हैं कि हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस बातचीत करना चाहती है, लेकिन भारत सरकार की संविधान के दायरे में रह कर बातचीत की शर्त के बग़ैर.

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उन्होंने बताया, "भारत सरकार ने 2002 में गिलानी साहब के कई रिश्तेदारों के घरों पर आयकर के छापे मारे थे जिनमें से एक मैं भी था. लेकिन बाद में ये साफ़ हो गया कि वो फ़र्ज़ी केस के आधार पर हुआ."

नईम गिलानी पेशे से डॉक्टर हैं. वो श्रीनगर में अपने पिता के साथ रहते हैं. उनका कहना है कि एनआईए 2011 में उनके खिलाफ दर्ज किसी केस के हवाले से उनसे पूछताछ करना चाहती है. उनके अनुसार उन्हें इस केस के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

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नईम गिलानी पाकिस्तान में आठ साल रहने के बाद 2010 में श्रीनगर वापस लौटे थे. उन्होंने बताया, ''मैं इख्वान (आत्मसमर्पण करने वाले चरमपंथियों) के हमलों के डर से पाकिस्तान चला गया था. मैं पासपोर्ट के साथ लीगल तरीके से पाकिस्तान गया था और क़ानूनी तरीक़े से वापस लौटा.''

पाकिस्तान में आठ सालों तक क्या किया? इस सवाल पर वो बोले, "मैंने वहां डॉक्टरी की पढ़ाई की और कुछ साल डॉक्टर की हैसियत से काम भी किया.''

नईम गिलानी आजकल श्रीनगर के एक सरकारी अस्पताल में काम करते हैं.

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