उत्तराखंडः बाढ़ में 18 की मौत, 18 लापता

    • Author, शिव जोशी
    • पदनाम, देहरादून से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
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उत्तराखंड में भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन में कम से कम 18 लोगों की मौत हुई है जबकि 18 लोग लापता हैं.

उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन सचिव शैलेश बगोली ने पुष्टि की है कि पिथौरागढ़ और चमोली जिलों में अतिवृष्टि और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या 18 हो गई है, 18 लोग अब भी लापता हैं.

शनिवार की शाम देहरादून की विकासनगर तहसील में भी बादल फटे हैं जिसमें कई मकान मलबे में दब गए हैं. इसमें जान-माल के नुकसान की आशंका है.

भारी बारिश से आम जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. चार धाम यात्रा पर भी इसका असर पड़ा है.

शनिवार सुबह गंगोत्री हाइवे उत्तरकाशी के पास 50 मीटर बह गया है. यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर ही रोक दिया गया है. सीमा सड़क संगठन के जवान रास्ता साफ करने में जुटे हैं.

भारी बारिश के बीच बद्रीनाथ जाने वाली सड़क भी जगह जगह मलबा आने से लगातार बाधित हो रही है. यात्रियों और वाहनों को कई जगहों पर रोका गया है.

उत्तराखंड की सभी प्रमुख नदियां ख़तरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. गढ़वाल मंडल में भागीरथी, भिलंगना, अलकनंदा, मंदाकिनी के अलावा कुमाऊं की शारदा, कोसी, काली और सरयू नदियां भी उफान पर हैं. स्थानीय गाड गदेरे (बरसाती नदियां) भी उफ़नते हुए बह रहे हैं.

ऋषिकेश में गंगा नदी खतरे के निशान के पास पहुंच गई है. लोगों को अलर्ट करते हुए नदी से दूर रहने को कहा गया है.

उधर पहाड़ी इलाकों में कई गांवों से लोग सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं. बृहस्पतिवार देर रात और शुक्रवार तड़के पिथौरागढ़ और चमोली जिलों के जिन गांवों में भूस्खलन, अतिवृष्टि और बादल फटने से तबाही हुई है, वहां राहत का काम जारी है.

पिथौरागढ़ का बस्तड़ी गांव लगभग पूरा का पूरा जमींदोज़ हो गया है. गांव के पास बने पंचायत भवन की इमारत किसी तरह इस भूस्खलन में बच गई जहां अब जीवित बचे हुए लोगो ने शरण ली है.

राज्य सरकार ने शनिवार को बताया कि पिथौरागढ़ में 12 मौते हुई हैं जबकि 15 लोगों की तलाश जारी है.

उधर चमोली में तीन मौते हुई हैं, छह लोग अब भी लापता हैं. करीब 200 मवेशी बह गए हैं. दर्जनों मकान मलबे में दब गए हैं. खेती को भी भारी नुकसान हुआ है.

देहरादून स्थित बीजापुर अतिथि गृह में शनिवार को कैबिनेट मीटिंग के दौरान मुख्यमंत्री हरीश रावत और अन्य मंत्रियों ने राज्य में हुई अतिवृष्टि से आई आपदा में चल रहे राहत कार्यों की समीक्षा की.

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा, "भूस्खलन से जमीन का अप्रत्याशित धंसाव हुआ था. राहत के लिए गए लोग भी मलबे में दब गए. इतनी तेज़ी से ज़मीन धंसने का मामला देखने को मिला है. हम सजग हैं. राहत का काम पूरे जोरों पर हैं. कोई कमी नहीं रखी जाएगी."

तीन और चार जुलाई को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया था जिसे अब 21 जुलाई तक के लिए टाल दिया गया है.

मौसम विभाग ने शुक्रवार को 72 घंटों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की थी. पहाड़ी और मैदानी इलाकों में अगले 48 घंटों तक स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन को मुस्तैद रहने के लिए कहा गया है.

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