बिहार चुनावः फिर मोदी नाम के भरोसे भाजपा

अमित शाह, पटना भाजपा रैली
    • Author, मनीष शांडिल्य
    • पदनाम, पटना से, बीबीसी हिन्दी के लिए
  • प्रकाशित

साल के अंत में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार की शुरुआत करते हुए भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बिहार के विकास की बात कही है.

राजनीतिक विश्लेषक इसे दिल्ली को छोड़ अन्य राज्यों में मोदी के ही नाम पर चुनाव लड़ने की रणनीति को बिहार में भी अपनाने के तौर पर देख रहे हैं.

पटना के गांधी मैदान में आयोजित 'विराट कार्यकर्ता समागम' में पार्टी ने कार्यकर्ताओं को 'बूथ जीता-चुनाव जीता' मंत्र के साथ 'जय-जय बिहार, भाजपा सरकार' का नारा दिया.

काला धन पर ख़ामोशी

अमित शाह, पटना भाजपा रैली

अमित शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं के कहा, ''आप यहां से यह संकल्प लेकर जाएं कि बिहार में जब तक दो-तिहाई बहुमत से भाजपा की सरकार नहीं बनती, हम आराम नहीं करेंगे.''

उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कार्यकर्ताओं से कहा कि बिहार को 'जंगलराज' से मुक्ति दिलाने और सूबे का विकास करने की ज़िम्मेदारी उनकी है.

भूमि बिल के संबंध में अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की एक इंच जमीन भी कॉर्पोरेट्स के लिए नहीं लेगी.

सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि बिहार के कुछ दल सिद्धांतों को ताक पर रखकर, जनता की आंखों में धूल झोंककर सरकार बनाना चाहते हैं.

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उन्होंने सूबे में मैट्रिक परीक्षा के दौरान हुई बड़े पैमाने पर नकल का जिक्र करते हुए कार्यकर्ताओं से पूछा क्या वे ऐसी ही हुकूमत कायम रखना चाहते हैं?

अपने भाषण के दौरान अमित शाह या राजनाथ सिंह ने काला धन वापसी और मंहगाई जैसे मसलों पर कुछ नहीं कहा.

'नाक का सवाल'

अमित शाह, पटना भाजपा रैली

भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने 'जनता परिवार' के विलय पर चुटकी ली, "हमारी ताकत इसी में दिखती है कि लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार खुद अपना नामो-निशान मिटा रहे हैं."

इनके अलावा राज्य विधानमंडल दल के नेता सुशील मोदी, विधानसभा में विपक्ष के नेता नंदकिशोर यादव और प्रदेशाध्यक्ष मंगल पांडे ने भी सम्मेलन को संबोधित किया.

बिहार उन राज्यों में से एक है जहां भाजपा आज तक अपने नेतृत्व में सरकार नहीं बना पाई है.

वरिष्ठ पत्रकार सुरूर अहमद कहते हैं, ''भाजपा के लिए साल के अंत में होने वाले चुनाव न सिर्फ बतौर पार्टी एक चुनौती है बल्कि नाक का सवाल भी है.''

पटना भाजपा रैली

जानकारों के मुताबिक बिहार में राजद और जदयू के प्रस्तावित विलय के बाद भाजपा के लिए बिहार चुनाव और भी चुनौतीपूर्ण हो गए हैं.

गौरतलब है कि जीतनराम मांझी के बागी होने के बाद बिहार के वर्तमान सियासी समीकरण में दलित चुनावी राजनीतिक के हिसाब से बहुत महत्त्वपूर्ण समूह माने जा रहे हैं.

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