कलाकार मौजूद नहीं, पर सुनाई देती है आवाज़...

राम किंकर बैज, प्रदर्शनी
    • Author, प्रीति मान
    • पदनाम, फ़ोटो पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

कलाकार, मूर्तिकार, चित्रकार और नाटककार रामकिंकर बैज की कृतियों की प्रदर्शनी दिल्ली के इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स(आईजीएनसीए) में चल रही है.

इस प्रदर्शनी की ख़ास बात ये है कि अपनी बात कहने के लिए कलाकार खुद मौजूद नहीं है, पर हर जगह उसकी आवाज़ सुनाई दे रही है. उसकी कृतियाँ उसकी कहानी बयां कर रही है.

कलाकार

राम किंकर बैज, प्रदर्शनी

यह आम प्रदर्शनी नहीं है. यह दर्शक और कलाकार का संवाद है.

दर्शक इस कलाकार की कलायात्रा को सजीव देख, सुन और समझ रहा है.

आईजीएनसीए और विवादी थिएटर ग्रुप के साझा आयोजन से रामकिंकर बैज की कलायात्रा पर एक अनूठा प्रयोग किया गया है.

राम किंकर बैज, प्रदर्शनी

'409 रामकिंकर्स' नाम से यह थिएटर प्रदर्शनी रोज़ शाम दो घंटे 'इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स' में लॉन, एक्ज़िबिशन गैलरी और माटीघर में थिएटर परफॉरमेंस के ज़रिए पेश की जा रही है.

राम किंकर बैज, प्रदर्शनी

रामकिंकर से एक बार किसी ने पूछा आप ज्यादा चित्रकार हैं या मूर्तिकार? इस पर उनका जवाब था, "मैंने दोनों ही घोड़े दौड़ाएं हैं पर एक तीसरा घोड़ा भी दौड़ाया जो नाटक और संगीत है."

मूर्तिकला का जनक

राम किंकर बैज, प्रदर्शनी

रामकिंकर का जन्म कोलकाता के बांकुड़ा जिले के जोगीपाड़ा में एक ग़रीब परिवार में हुआ था. परिवार में कई लोगों का मुख्य पेशा शिल्पकारी ही था.

घर से ही किंकर में मूर्तिकला का बीज पड़ा. माता-पिता के साथ ही मामा से भी उन्होंने मूर्तिकला की बारीकियां सीखीं.

रुझान इस कदर था कि स्कूल की छुट्टी होते ही रामकिंकर सीधे अनंत मिस्त्री के यहां पहुंच जाते.

रामकिंकर ने कंक्रीट, मिट्टी, प्लास्टर ऑफ़ पेरिस और अन्य उपलब्ध संसाधनों से आकर्षक मूर्तियां तैयार कीं.

राम किंकर बैज, प्रदर्शनी

साल 1906 में जन्मे बैज की मूर्तिकला को देखते हुए ही उन्हें भारतीय आधुनिक मूर्तिकला का 'जनक' कहा जाता है.

जब रामकिंकर शांतिनिकेतन पहुंचे तब उनकी उम्र 19 वर्ष थी. रामकिंकर ने आदिवासियों की जीवन शैली, रहन-सहन को नजदीक से देखा और उसे अपनी कला और शिल्प के ज़रिए आम लोगों तक पहुंचाया.

राम किंकर बैज, प्रदर्शनी

संथाल परिवार का उनका शिल्प आज भी शांतिनिकेतन परिसर की शोभा बढ़ा रहा है.

यक्ष-यक्षिणी की कहानी

राम किंकर बैज, प्रदर्शनी

रामकिंकर ने आजीवन विवाह नहीं किया. वह कहते थे, "मेरा बाल विवाह हो चुका है, अपने काम के साथ."

रामकिंकर धुन के पक्के थे, कभी थकते नहीं थे. मौसम के असर से बेखबर यह अनोखा कलाकार अपने चित्रों और शिल्पों में इतना डूबा होता था कि दिन और रात का भेद भूल जाता था.

राम किंकर बैज, प्रदर्शनी

आप कभी दिल्ली के संसद मार्ग पर तो रिज़र्व बैंक कार्यालय के मुख्य द्वार पर यक्ष और यक्षिणी की विशाल मूर्तियों पर गौर करें.

एक कलाकार मित्र ने हाल ही में इसके बनने का किस्सा मुझे सुनाया था. हुआ यूं कि पंडित जवाहर लाल नेहरू ने रामकिंकर को रिज़र्व बैंक के लिए शिल्प बनाने का काम दिया, पर शिल्प पूरा होने के पहले ही आवंटित राशि खत्म हो गई और काम रुक गया.

राम किंकर बैज, प्रदर्शनी

नेहरू जी ने फिर से सारी राशि आवंटित करायी और जहां से शिल्प के लिए पत्थर मिले थे उस जगह से दिल्ली तक रेल लाइन डालकर पत्थर पहुंचाए गए तब जाकर यक्ष-यक्षिणी का 14 फीट ऊंचा का शिल्प तैयार हो पाया.

समझे दर्शक

राम किंकर बैज, प्रदर्शनी

रामकिंकर का कहना था कि दर्शक को अपनी सीट पर बैठने से पहले नाटक के मंच का एक चक्कर लगाकर सेट को देखने-समझने को कहा जाना चाहिए ताकि वह नाटक को और बेहतर ढंग से जान सके.

इसी तरह इस प्रदर्शनी में भी दर्शक दूर से निहारने की बजाय इस यात्रा का हिस्सा बनता है और रामकिंकर की यात्रा को बेहतर ढंग से समझ पाता है.

इस नाट्य व कला प्रदर्शनी ने नैशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा की डायरेक्टर रह चुकी अनुराधा कपूर, कलाकार विवान सुंदरम, सांतनु बोस, रिमली भट्टाचार्य और अदिति बिस्वास के दो साल के परिश्रम के बाद साकार रूप लिया.

राम किंकर बैज, प्रदर्शनी

यह दो घंटे की इंस्टालेशन, कला-नाट्य प्रदर्शनी 2 अप्रैल तक इंदिरा गांधी नैशनल सेंटर फॉर आर्ट्स में रोज शाम 6:30 से 8:30 तक दिखाई जाएगी.

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