विष्णुभाई मेहताः जीवन चलने का नाम, मोटरसाइकिल पर

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    • Author, गौरी घारपुरे
    • पदनाम, गोवा से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

ठीक एक साल पहले 26 जनवरी, 2013 को गुजरात के नवसारी निवासी, विष्णुभाई मेहता, ने यादगार मोटरसाइकिल यात्रा शुरू की थी.

उन्होंने वास्तविक रोमांच की भावना और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए 28 राज्य और चार केंद्र शासित प्रदेश का दौरा किया.

लगातार 75 दिन तक मोटरसाइकिल चलाने के बाद उनका दौरा 10 अप्रैल, 2013 को ख़त्म हुआ.

मेहता ने अपने इस महत्वाकांक्षी अभियान के दौरान 28,000 किलोमीटर मोटरसाइकिल चलाई और एक देश में सबसे ज़्यादा मोटरसाइकिल चलाने का गिनीज़ रिकॉर्ड कायम किया.

मेहता मोटरसाइकिल चालकों या जिन्हें बाइकर्स भी कहते हैं की परंपरागत छवि से जुदा नज़र आते हैं.

उनके न कोई टैटू है, न लंबे बालों की चोटी. वह अपने परिवार के से आदमी लगते हैं, जो अपनी उपलब्धियों को शर्माते हुए विनम्रता से बताते हैं.

हर साल 30,000 किमी

दरअसल वह बाइकिंग में एक आवेग के कारण या किस्मत के खेल के चलते आ गए.

<link type="page"><caption> (बाइकिंग के दीवानों की महफ़िल) </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2014/01/140125_india_motor_week_gallery_rd.shtml" platform="highweb"/></link>

विष्णु अपनी मां, हंसाबेन मेहता, के बहुत क़रीब थे. जब 1999 में उनकी अचानक मौत हो गई तो विष्णुभाई बहुत परेशान हो गए.

वह बताते हैं, "अंतिम संस्कार के बाद, मैंने सभी से कहा कि वह मुझे अकेला छोड़ दें और मैं चिता के पास घंटों बैठा रहा. मैंने सोचा कि मुझे अपनी मां की याद में कुछ अलग करना चाहिए. कुछ ऐसा जो मुझे भविष्य में अपनी मां के बिना जीने की प्रेरणा भी दे."

"और तभी किसी को बताए बिना मैं 'चार धामा यात्रा' पर निकल गया ताकि शास्त्रों में वर्णित सबसे पवित्र जगह पर अपनी मां की अस्थियां विसर्जित कर सकूं."

इंडिया बाइक वीक

विष्णु मेहता अहमदाबाद के नज़दीक हलवाड से मोटरसाइकिल पर केदारनाथ के लिए निकल पड़े और गोमुख तक पहुंचने के लिए 25 किलोमीटर ट्रेकिंग की.

इस अद्भुत अनुभव ने न सिर्फ़ उन्हें अपने दुख से बाहर आने में मदद की बल्कि देश के लोगों और जगह के बारे में एक नया नज़रिया भी दिया. उसके बाद से मेहता नियमित रूप से बाइकिंग कर रहे हैं.

मेहता एक एडवेंचर टूर बिज़नेस चलाते हैं और हर गर्मियों में वह मोटरसाइकिल से उत्तराखंड, लेह और लद्दाख जाते हैं जहां वह पर्यटकों के लिए विशेष रूप से तैयार कैंपों का आयोजन करते हैं.

वह हर साल औसतन 30,000 किलोमीटर लंबी यात्रा करते हैं. गिनीज़ बुक में नाम दर्ज कराने के बाद मेहता की इच्छा, 40 दिन में 40,000 किलोमीटर तय करने, की है.

भारत में खराब सड़कों और अनियंत्रित ट्रैफ़िक की वजह से यह यात्रा आसान नहीं है.

मेहता को उम्मीद है कि उन्हें अमरीका या ऑस्ट्रेलिया में इसके लिए प्रायोजक मिल जाएंगे. उनका एक सपना स्पेसिफ़ पार यात्रा का भी है- जो अलास्का से शुरू होकर अर्जेंटीना में ख़त्म हो.

इसके अलावा अफ़्रीका में भी वह एक यात्रा करना चाहते हैं जो मिस्र के अलेक्ज़ेंड्रिया से शुरू होकर केपटाउन में ख़त्म हो.

शिकायत

इंडिया बाइक वीक

मेहता को तकलीफ़ है कि हमारे देश में अब भी ऐसे रोमाचंक अभियानों, जो लीक से हटकर हों, को लेकर बेरुखी है और यहां प्रायोजक मिलना बहुत कठिन है. पूरे भारत की यात्रा के लिए मेहता को 2,40,000 रुपये ख़र्च करने पड़े.

हांलाकि उनका पसंदीदा बाइकिंग स्थान पुणे से बैंगलोर के बीच है लेकिन वह नए बाइकर्स को सलाह देते हैं कि वह बाइकिंग यात्राएं राजस्थान से शुरू करें, ख़ासतौर पर जैसलमेर, बीकानेर और बाड़मेर की सड़कों पर. नए बाइकर्स के लिए यह रास्ता आदर्श है क्योंकि सड़कें सपाट और अच्छी हैं. और ख़ास बात इनमें ट्रैफ़िक बहुत कम है.

विष्णुभाई इस पर भी ज़ोर देते हैं कि बाइकिंग का अच्छा सामान भी लिया जाए जिसमें अच्छी क्वालिटी का हेलमेट, नी गार्ड (घुटनों का सुरक्षा कवच), एल्बो गार्ड (कोहनियों का सुरक्षा कवच), जैकेट और दस्ताने हों. इसके अलावा पंचर लगाने, एयर फ़िल्टर और स्पार्क प्लग साफ़ करने की शुरुआती किट रखना अच्छा होगा. उनकी सलाह है कि लंबी यात्रा के लिए जब ज़रूरत हो तेल बदला जाए और हर 500 किलोमीटर पर चेन को साफ़ और स्प्रे किया जाए.

मेहता को सबसे ज़्यादा शिकायत इसी बात से है कि भारतीयों में अब तक ट्रैफ़िस के प्रति समझदारी नहीं आई है. वह बताते हैं कि इंडिया बाइक वीक में शामिल होने के लिए गोवा जाते वक्त एक शराबी ड्राइवर ने उन्हें करीब-करीब कुचल ही दिया था.

यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी बीवी उन्हें ख़तरनाक मोटरसाइकिल यात्राओं से दूर करने की कोशिश नहीं करती हैं, विष्णुभाई जवाब देते हैं, "अब तक तो जो भी हुआ है उसके समर्थन से ही हुआ है. मैं जो भी हूं उसकी वजह से ही हूं. वह जानता है कि इसमें ख़तरा है लेकिन वह बिना शर्त समर्थन करती है."

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